विषय- संस्कृत, प्रकरण- व्याकरण- प्रत्यय, शीट क्रमांक -69/2026, दैनिक संस्कृत शिक्षण
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क्रमांक- 69/2026
#दैनिक_संस्कृत_शिक्षण (अभ्यास कार्य)
दिनांक- 10/02/2026
दिन- मंगलवार
प्रकरण- #व्याकरण- प्रत्यय
अभ्यास_कार्य
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व्याकरण- प्रत्यय-
संस्कृत में प्रत्यय वे शब्दांश होते हैं, जो किसी धातु के अन्त में जुड़कर नए शब्दों का निर्माण करते हैं। ये प्रत्यय शब्दों के अर्थ, रूप, लिङ्ग और प्रयोग को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संस्कृत में प्रत्यय के तीन प्रमुख भेद हैं-
1- कृत् प्रत्यय
2- तद्धित प्रत्यय
3- स्त्री प्रत्यय
कृत प्रत्यय के अन्तर्गत हम कुछ प्रत्ययों के बारे में जानेंगे-
1- क्त्वा प्रत्यय- जब किसी धातु के द्वारा करके (खाकर, पीकर, सोकर) अर्थ प्रकट करना हो तो धातु के बाद ही क्त्वा प्रत्यय लग जाता है। अर्थात एक वाक्य में दो क्रिया और एक ही कर्ता हो तो पहले क्रिया में क्त्वा प्रत्यय होता है। क्त्वा का 'त्वा' शेष बचता है।
पठ् + क्त्वा = पठित्वा (पढ़कर)
चल् = क्त्वा = चलित्वा (चलकर)
वह पढ़कर विद्यालय जाता है।
(सः पठित्वा विद्यालयं गच्छति।)
अभ्यास प्रश्न-
प्रश्न-1 निम्नलिखित धातुओं को पूर्ण करो।
पठ् + क्त्वा=
हस् + क्त्वा=
गम् + क्त्वा=
कृ + क्त्वा=
प्रश्न -2 निम्नलिखित धातु और प्रत्यय को अलग-अलग करो।
लिखित्वा
नीत्वा
उक्त्वा
जितना
प्रश्न -3 सुमेलित करो-
गाकर- पीत्वा
खाकर- गीत्वा
पीकर- खादित्वा
पढ़कर- पठित्वा
तकनीकी सहयोगी एवं प्रमुख सहयोगी- #जुगल_किशोर_त्रिपाठी #झाँसी
एवं
#माया_त्रिपाठी #भदोही
संकलन:- #टीम_मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_संस्कृत_शिक्षण
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