27/2026, बाल कहानी- 13 फरवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 23/2026
*13 फरवरी 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी - #सही_वक्त 
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मोतीलाल नाम का किसान अपने तीन बेटों के साथ गाँव में रहते था। मोतीलाल के पास काफी जमीन थी। धन-धान्य से भरपूर घर था। मोतीलाल बहुत ही कन्जूस आदमी था। परिवार की कमान मोतीलाल के हाथ में थी। जब भी उनके बेटों को पैसे की जरूरत होती थी, वह पिता से कहते थे, "पिताजी! कुछ पैसे दे दो, कुछ खरीदना है।" पिताजी तुरन्त उत्तर देते, "मेरे पास कोई पैसे नहीं है। घर में बचते ही कहाँ है? खर्च भी तो बहुत है।" यह सुनकर बेटे बहुत उदास हो जाते थे। वह मन में सोचा करते थे कि मेरे पिता के पास किसी चीज की कमी नहीं है लेकिन जरूरत पड़ने पर वह हमें पैसे नहीं देते हैं। ऐसा कई बार हो चुका था। तीनों भाई बहुत दु:खी रहते थे।
एक दिन मोतीलाल की तबीयत खराब हो गई। उनके बेटे ने कहा, "पिताजी! कुछ पैसे दे दीजिए.. मैं डॉक्टर साहब को बुलाकर लाता हूँ।" मोतीलाल ने कहा, "मैं कोई मरने वाला नहीं हूँ! मैं बिल्कुल ठीक हूँ। जाओ, अपना काम करो।"
बड़ा बेटा उदास मन से बाहर आ गया। रात में पिता की तबीयत बहुत अधिक खराब हो गई। मोतीलाल के बेटे मोतीलाल को जबरदस्ती अस्पताल ले गये। मोतीलाल को कुछ होश नहीं था। जब वह होश में आये और ठीक हो गए तो उन्होंने अपने बेटे से कहा, "मुझे यहाँ कौन लाया, क्या कोई पैसा खर्च हुआ? मोतीलाल के बेटे ने कहा, "नहीं कोई पैसा खर्च नहीं हुआ पिताजी! आपको कुछ नहीं हुआ था, सिर्फ आपको दिखाने लाये थे।" 
जब मोतीलाल के बेटे मोतीलाल को गाँव लेकर पहुँचे तो पता चला कि किसी प्रकार उनके घर में आग लग गई। जैसे ही मोतीलाल ने देखा तो बुरी तरीके से घबरा गए और रोने लगे। मोतीलाल चिल्लाने लगे, "हाय! हाय! मेरा पैसा जल गया। अब मैं क्या करूँगा।" वह बुरी तरीके से दहाड़ मारकर रोने लगे। तभी उनके बड़े बेटे ने कहा, "पिताजी! मैं माफी चाहता हूँ। मैं जानता था कि आपने पैसे कहाँ रखे हैं। आपकी तबीयत खराब हो गई थी तो मैंने उस जगह से रखे सारे पैसे उठा लिए थे। पिता से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं है। पैसे नहीं जले हैं। आप चिन्ता ना करें।"
जैसे ही मोतीलाल ने यह बात सुनी, वह चुप हो गए। थोड़ी देर बाद बेटे ने पैसे निकालकर मोतीलाल के सामने रख दिए। बेटा बोला, "कुछ पैसे अस्पताल में खर्च हो गए।" मोतीलाल ने पैसे देखकर कहा,-" बेटा! अगर आज तुम यह पैसे यहाँ से लेकर नहीं जाते तो यह जल जाते। मेरा पैसे के प्रति इतना मोह रहा कि मैं भूल ही गया कि धन तो आता है और चला जाता है। धन का उपयोग जब भी मुसीबतें आयें, हमें कर लेना चाहिए। धन इकट्ठा होने से कभी खुशियांँ नहीं आती हैं बल्कि सच्ची खुशियाँ तब आती हैं, जब हम उसका प्रयोग खुशियाँ लाने में करें।" ऐसा कहकर मोतीलाल ने बचे सारे पैसे अपने बेटों को दे दिए और कहा, "बच्चों! मेरी असली दौलत तुम लोग हो। आज से जो भी पैसे आयेंगे, सब तुम्हारे हैं।" ऐसा कहकर मोतीलाल ने अपने बेटों को गले लगा लिया। उसके बेटे पिता में यह परिवर्तन देखकर बहुत प्रसन्न हुए।

#संस्कार_सन्देश -
विपत्ति आने पर धन का प्रयोग कर लेना चाहिए। धन की कीमत मजबूरी से ज्यादा नहीं होती है।

कहानीकार-
शालिनी (स०अ०) 
प्राथमिक विद्यालय- कूँड़
विकास क्षेत्र - करहल।
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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