होली का रंग सुहाना

तन-मन को  रंगीन बनाता

होली का  हर  रंग  सुहाना।।


लाल, गुलाल, नीला व पीला

अंतर्मन  को कर  दे गीला

सराबोर  रंग  में  रंग जाए

पिचकारी की धार रसीला

बच्चा  बूढ़ा  और   जवान

चढ़ा सभी पे फाग का गान

बिना  रंगे  बचे  ना  कोई

सबने  मन में यही  है ठान

चाहो  बच  जाऊँ  रंगों  से

चले नहीं कोई भी बहाना। 


तन मन को रंगीन बनाता

होली  का हर  रंग  सुहाना।।


घर - घर में  मीठे  पकवान

दलिया पूड़ी  की  हो बहार

खीर करे मदमस्त सभी को

हो जाए हर  किसी से प्यार

ना रहे किसी  से  कोई  भेद

हो दूर सभी गिला - शिकवा

हर  रंग, रंग  से मिल  जाए

तन-मन मानव का खिल जाए

हर इच्छा  हो पूर्ण  सभी की

न रहे किसी की आस पुरानी।


तन - मन  को  रंगीन  बनाता

होली  का  हर  रंग  सुहाना।।


रचयिता

डॉ0 रमेश कुमार यादव "अहान"

सहायक अध्यापक,

कम्पोजिट विद्यालय गुरचिहा,

विकास खण्ड-बृजमनगंज,

जनपद-महराजगंज।

Comments

Total Pageviews