मन मंदिर

प्रह्लाद सी निश्छलता को,

  जरा लाओ अपने मन में।

       तभी सजेगा मन मंदिर ये,

           बस जाएँगे प्रभु अंतर्मन में।


सच्चाई की राह चुनो तुम,

  झूठ कपट को त्यागो।

      माया के वश में ना आओ,

          छल दंभ द्वेष सब त्यागो।


जिह्वा पर हो नाम प्रभु का,

  हो नयनों में छवि प्यारी।

      भक्ति भाव में रम जाओ,

          भूल के सारी दुनियादारी।


चाहें संकट के बादल छाएँ,

  या हो कितनी भी लाचारी।

     ईमान धर्म पर आँच न आए,

         बस इतनी कोशिश हो हमारी।


रचनाकार

सपना,

सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उजीतीपुर,
विकास खण्ड-भाग्यनगर,
जनपद-औरैया।


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