46/2025, बाल कहानी- 15 मार्च

#दैनिक_नैतिक_प्रभात-46/2025
15 मार्च 2025 (शनिवार)
#बाल_कहानी - #रुचि_का_महत्व
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सोहन एक छोटे से गाँव में रहता था। वह गाँव में खेती-बाड़ी करता था। उसके दो बेटे थे- रोहन और रोहित। उसकी पत्नी रीमा घर के काम सँभालती थी। सोहन अपने दोनों बेटों को बहुत प्यार करता था।
सोहन चाहता था कि उसके दोनों बेटे बड़े होकर इंजीनियर बने। इसके लिए वह बचपन से उनकी पढ़ाई पर ध्यान देता था। 
रोहन और रोहित दोनों पढ़ाई में बहुत अच्छे थे, लेकिन रोहन को गणित विषय में बिल्कुल भी रुचि नहीं थी। उसे तो कृषि कार्य ही अच्छा लगता था। समय मिलने पर वह पापा से पेड़-पौधों की बातें करता। सोहन लगातार बच्चों को कठिन-परिश्रम करने की सलाह देता था। फिर भी रोहन के नंबर गणित में अच्छे नहीं आते थे।
इण्टर की वार्षिक परीक्षा का रिजल्ट आया। रोहित की तुलना में रोहन के गणित में कम नम्बर आये। क्योंकि रोहन को गणित विषय में बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। उसकी रुचि तो कृषि कार्य में थी, जिस पर सोहन रोहन से बहुत नाराज हुआ और रोहित की प्रशंसा की।
धीरे-धीरे समय व्यतीत होता गया। रोहन और रोहित ने इंजीनियरिंग की परीक्षा साथ साथ दी। परीक्षा में रोहित को तो सफलता मिली लेकिन रोहन असफल रहा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए रोहित दूसरे शहर चला गया। रोहन को पिता ने बहुत भला बुरा कहा। पर रोहन ने हार न मानी। उसने अपनी रुचि के अनुसार कार्य करने का निश्चय किया। उसने गाँव में ही खेती-बाड़ी शुरू की। कृषि के नये नये वैज्ञानिक तरीके अपनाये। थोड़े ही समय में उसने अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर ली। उसने मशरूम की खेती की। जिसमें उसे अपार सफलता मिली। चारों ओर गाँव में उसकी प्रशंसा होने लगी। 
उसे अपने कार्य में खूब मुनाफा हुआ। साथ ही साथ उसके कार्य को स्थानीय सरकार की ओर से सराहा गया क्योंकि उसने अपने साथ-साथ अन्य लोगों को भी अपने कार्य में शामिल कर लिया। उन्हें रोजगार दिया। धीरे-धीरे उसका चारों ओर उनका नाम होने लगा।
आज बेटे की कामयाबी देख सोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह अपने बेटे के पास गया और बोला, "बेटा! मुझे माफ कर दो। मैंने बचपन से ही अपनी इच्छाओं को तुम्हारे ऊपर थोपना चाहा। तुम्हारी रुचि को नहीं पहचाना। अगर बचपन से ही मैंने तुम्हारी रुचि अनुसार शिक्षा दी होती तो तुम्हें परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। रोहन की आँखों में खुशी के आँसू थे। आखिरकार उसके पिता ने उसकी रुचियाँ को पहचान लिया था। यह कहकर सोहन ने बेटे रोहन को गले लगा लिया।

#संस्कार_सन्देश-
हमें अपने बच्चों पर अपनी इच्छाएँ नहीं थोपनी चाहिए। बच्चों को उनकी रुचि के अनुसार शिक्षा देना चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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