बाप

खुदा की बंदगी ऐ दोस्तों फर्ज़े शरीअत है,
तो चेहरा देखना भी बाप का यारों इबादत है,

वही इस रंगे दुनिया से हमे वाक़िफ़ कराता है,
वही दुश्वार राहों पर हमें चलना सिखाता है।

हमारे वास्ते दिन-रात बस वह काम करता है,
हमारे ख्वाब में सच्चाई के वह रंग भरता है।

दुआएँ हर घड़ी हर पल हमेशा करता रहता है,
हमारी झोलियाँ खुशियों से हर दम भरता रहता है।

न हो जिन बच्चों के पापा भला वो कैसे रहते हैं,
ज़माने भर की सब दुश्वारियाँ तन्हा ही सहते हैं।

सभी रिश्ते दिखावे के सब ही छोड़ जाते हैं,
सफर में ज़िन्दगी के वह अकेला खुद को पाते हैं।

हमारे वास्ते दुनिया में कोई रो नही सकता,
ज़माने में कोई भी बाप जैसा हो नहीं सकता।

"अनस"दुनिया मे सबसे ज़्यादा तू उनकी ही इज़्ज़त कर,
अगर माँ-बाप ज़िंदा हैं तो उनकी खूब खिदमत कर।
   
रचियता
अनस मजीदी,
प्राथमिक विद्यालय चमरौला,
विकास खण्ड-लोधा, 
जनपद-अलीगढ़।

Comments

Total Pageviews