बेटी की अभिलाषा


पापा मेरा नाम लिखा दो 
मैं   भी   पढ़ने   जाऊँगी,
बी०ए०,एम०ए० पढ़ लिखकर
मैं   प्रोफेसर   बन   जाऊँगी,
प्रोफेसर  बन  कर  के  मैं
सबको  यह  समझाऊँगी,
बेटी  नहीं बेटे  से  कम है
यह   सबको  बतलाऊँगी,
पापा मेरा नाम लिखा......
मदर टेरेसा बन कर के मैं
प्रेम   दया   सिखलाऊँगी,
आशा और लता जी बनकर
जीवन  मधुर  बनाऊँगी,
ऐश्वर्या और सानिया बनकर
देश  को  गर्व  दिलाऊँगी,
पापा मेरा नाम लिखा......
सुनीता विलियम्स बनकर के
मैं  दूर  गगन  में  जाऊँगी,
प्रतिभा पाटिल बन कर के
मैं भारत को राह दिखाऊँगी,
इंदिरा गाँधी  बनकर  के
मैं देश पर यूँ मिट जाऊँगी,
पापा मेरा नाम लिखा......
नहीं मिलेंगे नर धरती पर
यह  सबको  बतलाऊँगी,
मादा भ्रूण हत्या को रोको
जन जन में प्रचार कराऊँगी,
बेटी नहीं किसी से कम है
चीख-चीख  चिल्लाऊँगी,
पापा  मेरा नाम लिखा....
रचयिता

उमा शुक्ला,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय काज़ी देवर ll,
शिक्षा क्षेत्र-झंझरी,
जिला-गोण्डा।

Comments

  1. बहुत ही सुंदर पंक्तियां हैं मैडम

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  2. बहुत ही सुदंर अभिव्यक्ति ,

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