माँ
माँ है तो सब कुछ संभव है
माँ ही सुकून व राहत है।
माँ बिन जग सूना लगता है
उसका प्रेम इबादत है।
थक जाती जब दुनिया सारी
तब भी रखती हिम्मत है।
सृष्टि की तू ही सर्जक है
माँ बच्चों की ताकत है।
नयन बिछाए राह तकें वो
पल- पल करे हिफाजत है।
रखती आँचल की छाँव तले
हर दुख से करे बगावत है।
बिन बोले सब कुछ सुन लेती
माँ खुद में ही सरगम है।
सम्मान करो हर दिन माँ का
वो ही खुदा की इनायत है।
खोया सम्मान बुजुर्गों का
पग- पग पर वृद्धाश्रम है।
मातृ दिवस और पितृ दिवस
प्रेम नहीं बस दिखावट है।
व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टा
पर ही बस जगमगाहट है।
असल में माँ के प्रति प्रेम समर्पण
हमको नजर न आवत है।
माँ भी अब बच्चों में बँटती
भावों में शुद्ध मिलावट है।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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