माँ
माँ दीपक माँ वर्तिका, माँ घृत का आवेग।
माँ ही लौ माँ रोशनी, माँ मन का संवेग।1।
माँ नदिया माँ धार है, माँ ही है पतवार।
माँ के आंचल में पला, जीवन का आधार।।।2।
मांँ कागद मांँ लेखनी, मांँ शब्दों का ज्ञान।
मांँ गीतों की श्रंखला ,माँ ही स्वर लय तान।3।
मांँ शरीर माँ आत्मा मांँ सांसों का सार।
मांँ जीवन मांँ मोक्ष है, माँ ही तो संसार।4।
माँ देहरी मांँ द्वार है, मांँ घर का वट वृक्ष।
उस आंँचल की छांव में, दिखें ईश प्रत्यक्ष।5।
मांँ गीता मांँ भागवत ,माँ ही वेद पुराण।
मांँ हरडे़ वाणी सदा ,माँ ही पाक कुरान।6।
मांँ शक्ति मांँ ढाल है ,माँ ही तो तलवार।
जो दुखों को काटकर ,देती सुख का सार। 7।
मांँ रिश्तों की चादरें, सिलती बारम्बार।
मन की गांठे खोलती, और बांँटती प्यार। 8।
मांँ माटी मांँ चौक है, कुम्भकार का रूप।
जो जीवन को ढालती ,जग समाज अनुरूप।9।
मांँ बचपन मांँ लोरियाँ, मांँ थपकी माँ नींद।
मांँ सपना मांँ जागरण मांँ मोहक उम्मीद।10।
रचयिता
यशोधरा यादव 'यशो'
सहायक अध्यापक,
कंपोजिट विद्यालय सुरहरा,
विकास खण्ड-एत्मादपुर,
जनपद-आगरा।

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