जब राजकुमार सिद्धार्थ बन गए बुद्ध
लिया जन्म सिद्धार्थ ने
हो गई धरा धन्य
हुई धरा आलोकित
पाकर बुद्ध का तेजपुंज।
जीवों पर दया करो
सत्कर्मों की पूँजी जमा करो
प्रेम का संचार करो
यही है जीवन का श्री गणेश।
न सोचो भूत, भविष्य और वर्तमान
सोचो क्या है अस्तित्व तुम्हारा
संयम ही है बल तुम्हारा
आध्यात्मिकता ही दे जीवन को किनारा।
कर नियंत्रण खुद पर
बनना है अपना ही रक्षक
है यही प्रथम उपदेश
जो दे रहा हमें संदेश।
दिमाग को वर्तमान में केन्द्रित करना
ही हो हमारा उद्देश्य
जीत जायेंगे हर जंग
है यही बुद्ध का अन्तिम उपदेश।
हे प्रभु करें अनुसरण आपका
बनें हम विवेकी
बनायें ज्योतिर्मय रास्ता
बन जाएँ जीवन ज्योति।।
रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।

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