महिला सशक्तीकरण विशेषांक- 330
*👩👩👧👧महिला सशक्तीकरण विशेषांक- 330*
*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*
दिनांक- 30.05.2025
नाम:- श्रीमती कल्पना राजौरिया
पद:- प्रधानाध्यापक ( प्रभारी)
विद्यालय:- उच्च प्राथमिक विद्यालय, कटरा पठानान, फिरोजाबाद (उ.प्र.)
*सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-*👉
★प्रथम नियुक्ति: 07.01.2006 सामाजिक सेवा की शुरुआत: 1992, जब मेरी नियुक्ति उच्च प्राथमिक विद्यालय कटरा पठानान, फिरोजाबाद में हुई। जब मैंने कार्यभार संभाला, तब विद्यालय में कुल 16 छात्र-छात्राएं थे, जिनमें केवल तीन बालिकाएं थीं। यह विद्यालय शहर की एकमात्र पंजीकृत मलिन बस्ती में स्थित है। मैंने संकल्प लिया कि इन बेटियों को शिक्षा से जोड़ूंगी, उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल दूंगी। मैंने ना केवल पढ़ाया, बल्कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों से भी लड़ी। अब तक मैं 6 से अधिक बालविवाह रुकवा चुकी हूँ और अनेक परिवारों को बालिका शिक्षा की महत्ता समझा चुकी हूँ। आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों को मैने पात्रता के हिसाब से सरकारी योजना का लाभ दिलाया। अभिभावकों को बाल श्रम कानून के बारे में बताया। जिससे अभिभावकों ने बच्चों को बालश्रम से दूर रखा और नियमित विद्यालय भेजा।
★ वर्तमान नियुक्ति/वर्तमान कार्यक्षेत्र- वर्तमान में मैं इस विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका हूँ और एकमात्र शिक्षिका हूँ। मैं अकेले ही 80 से अधिक बच्चों को शिक्षित कर रही हूँ। इनमें बालिकाओं की संख्या विशेष रूप से अधिक है। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु आत्मरक्षा प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और शिक्षा के बाद भी सतत फॉलोअप जैसे प्रयास मेरे कार्य का अभिन्न हिस्सा हैं।
★ प्रारंभिक परिचय- प्रधानाध्यापिका ( प्रभारी) – उच्च प्राथमिक विद्यालय कटरा पठानान
☆निर्वाचन आयोग द्वारा जिला ब्रांड एंबेसडर – SVEEP (5 वर्ष)
☆नगर निगम फिरोजाबाद की प्रथम स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर
☆जायंट्स इंटरनेशनल फेडरेशन-5 की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर
☆मिशन शक्ति अभियान की नोडल अधिकारी,
☆रेडक्रॉस सोसाइटी की सचिव
☆परिवार परामर्श केंद्र की काउंसलर,
☆स्वयं 42 बार से अधिक रक्तदान
★ विद्यालय और जीवन की समस्याएँ व समाधान:- मेरे विद्यालय की सबसे बड़ी चुनौती थी, संसाधनों की भारी कमी। विद्यालय किराए की इमारत में चलता है और विभागीय उदासीनता के कारण कोई विशेष विकास नहीं हो पाता। जब छात्र संख्या बढ़ी तो बैठने की जगह नहीं थी। मैंने जायंट्स ग्रुप महिला शक्ति के सहयोग से टीन शेड डलवाया, लायंस क्लब की सहायता से शौचालय बनवाए और बच्चों के बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था करवाई। बिजली की समस्या को सामूहिक सहभागिता से इन्वर्टर लगवाकर सुलझाया।
अभिभावकों की आर्थिक तंगी भी एक बड़ी बाधा थी। मैंने पात्रता अनुसार उन्हें राशन कार्ड, छात्रवृत्ति, पेंशन आदि से जोड़ा, ताकि उनके बच्चे पढ़ाई से जुड़ सकें।
★ मेरे संघर्ष और उपलब्धियाँ- बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य मेरे लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। मैंने देखा कि माहवारी के दौरान बच्चियां विद्यालय नहीं आतीं। मैंने उनकी माताओं को साथ लेकर मीटिंग की, सैनिटरी पैड्स के फायदे बताए और निःशुल्क वितरण शुरू किया। अब हर महीने 200 से अधिक पैकेट वितरित होते हैं – यहां तक कि पूर्व छात्राएं भी विद्यालय आकर पैड ले जाती हैं। RTE के तहत मैंने 150 से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त दाखिला दिलवाया। कई बार निजी स्कूलों ने नियमों की अनदेखी की, तो मैंने नियमों का हवाला देकर बच्चों को स्कूल में बनाए रखा। कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न हो, इसके लिए मैंने लगातार आवाज उठाई।
★ कार्यक्षेत्र की उपलब्धियाँ- बालिकाओं की संख्या और उपस्थिति में जबरदस्त वृद्धि
▪︎6 से अधिक बालविवाह रोके
•RTE के अंतर्गत 150 से अधिक बच्चों का प्रवेश,
•55+ छात्राओं को 9वीं कक्षा में फिर से शिक्षा से जोड़ा
▪︎माहवारी स्वच्छता जागरुकता व पैड वितरण
▪︎टायलेट, टीन शेड, बेंच, इन्वर्टर आदि संसाधनों का सृजन
▪︎रक्तदान के प्रति जनजागरूकता ▪︎42 बार स्वयं रक्तदान
▪︎छात्राओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण
▪︎बाल श्रम की प्रवृत्ति रोकने हेतु सामुदायिक हस्तक्षेप
★ स्वयं की उपलब्धियाँ:- ●मेरे प्रयासों को अनेक मंचों पर सराहा गया है, DM, SSP, BSA सहित अनेक अधिकारियों द्वारा सम्मानित
●शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश के कर कमलों द्वारा सम्मान प्राप्त
●वोडाफोन-आइडिया राष्ट्रीय पुरस्कार,
●एक लाख रुपये की छात्रवृत्ति
●मिशन शक्ति में उत्कृष्ट योगदान हेतु ADG अनुपम कुलश्रेष्ठ द्वारा मंच से सम्मान
●रेडक्रॉस, रोटरी क्लब, जायंट्स ग्रुप से विशेष मान्यता
●5 वर्षों तक SVEEP की जिला ब्रांड एंबेसडर एवं नगर निगम फिरोज़ाबाद की स्वच्छता अभियान की ब्रांड एम्बेसडर
★ मिशन शिक्षण संवाद के लिए मेरा संदेश- "हम शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाले हैं। मैं चाहती हूँ कि हर बेटी शिक्षित हो, जागरूक बने और आत्मनिर्भरता की राह पर चले। मिशन शिक्षण संवाद जैसे मंच हमें प्रेरणा देते हैं – "मेरा संदेश है कि हम सभी शिक्षक अपनी भूमिका को केवल नौकरी न मानें, बल्कि समाज में परिवर्तन के लिए समर्पण के रूप में निभाएं। शिक्षा से बड़ा कोई सशक्तिकरण नहीं।
_✏संकलन_ -
ज्योति कुमारी(शक्ति संवाद)
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*
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