84/2025, बाल कहानी- 10 मई
बाल कहानी - वृक्षारोपण
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"माँ..माँ..आज तो बहुत गर्मी लग रही है। पंखे की भी गर्म हवा आ रही है। क्या करुँ?" अजय ने माँ से कहा।
"बेटा! अब गर्मियों के दिन हैं, गर्मी तो लगेगी ही।" माँ ने कहा।
"लेकिन माँ घर के बाहर चौराहे पर जो बड़ा-सा बरगद का वृक्ष लगा है। उसके नीचे बहुत ठण्डी हवा लगती है। वहाँ गर्मी नहीं लगती है। माँ! क्या हम अपने घर के द्वार पर एक नीम या जामुन का पेड़ नहीं लगा सकते?" अजय बोला।
"लगा तो सकते हैं, लेकिन उसे बड़ा होने में समय लगेगा।" माँ ने कहा।
"समय तो लगेगा, लेकिन दो-चार साल में वह बड़ा हो जायेगा और ठण्डी हवा देने लगेगा। फलदार वृक्ष लगाने से वह फल भी देगा।" अजय की बात सुनकर माँ बोली, "बात तो तुम्हारी सही है। मैं नर्सरी से दो-चार बड़े वृक्ष आँवला, जामुन, नीम और पाकर के मँगवा लूँगी। कुछ दिनों बाद बरसात आने वाली है। बरसात शुरु होते ही मैं इन वृक्षों को मँगवा लूँगी।" माँ की बात सुनकर अजय बहुत खुश हुआ।
कुछ दिनों बाद जैसे ही बरसात शुरु हुई। उसी समय ग्राम प्रधान द्वारा गाँव में वृक्षारोपण हेतु विभिन्न प्रकार के पेड़-पौधे मँगाए गये। राहुल की माँ आँवला, नीम, पाकर और जामुन के वृक्षों के साथ कुछ फूलों वाले पौधे भी ले लिए। उसने और राहुल ने मिलकर उन्हें घर के द्वार के दोनों ओर लगा दिए और कुछ पौधे घर के आँगन में लगा दिए। कुछ ही दिनों में उन पर फूल आने लगे और लतायें चारों ओर फैल गयीं। घर का वातावरण सुहावना हो गया। राहुल के वृक्षारोपण को देखकर सभी गाँववालों भी वैसा ही किया। अब पेड़-पौधौं की ठण्डी हवा और फूलों की महक तथा हरे-भरे पत्तों से घर में ठण्डक रहने लगी। दो-चार साल में वे वृक्ष भी बड़े हो गये और फल देने लगे। नीम और पाकर वृक्ष से छाया मिलने लगी। अब राहुल बहुत खुश था।
#संस्कार_सन्देश -
हमें भी अपने घर-आँगन में पेड़-पौधे लगाने चाहिए। इससे घर का वातावरण स्वच्छ और सुन्दर रहता है और हमें शुद्ध हवा के साथ फल भी मिलते हैं।
कहानीकार-
जुगल किशोर त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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