नित अर्चना

माँ से बढ़कर कोई नहीं, 

हर पल है माँ का साथ, 

है जो प्यार का सागर, 

समाया जिसमें सारे जहां का प्यार। 


आशीष वचन माँ के करते रखवाली सदा, 

    बनकर पहरेदार, 

आशीष -हस्त बनकर छत्र -छाया, 

        रहता सदा साथ। 


नयनों में झलके परवाह सदा, 

       ईश्वर ही समझे भावों का सैलाब, 

सोचे आंचल को बढ़ा लूँ इतना, 

छू न सके कोई धूल भरा तिनका। 


धरती माँ की गोद और प्रकृति माँ का आंचल, 

पलता, खेलता, पोषित होता जिसमें सबका जीवन, 

    ऐसी मातृभूमि को कोटि- कोटि नमन, 

ऐसी भारत माँ को शत् - शत् नमन्, 

माँ को कोटि -कोटि चरण- वन्दन, 

हे प्रभु माँगें तुमसे आज यही वरदान, 

रहे सलामत हमारी माँ, 

रहे सदा आपका साथ।


रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका, 
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।


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