81/2025, बाल कहानी- 07 मई


बाल कहानी - उपहार
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रामनाथ एक छोटे से गाँव में रहता था। वह खेती बड़ी करके अपना जीवन यापन करता था। उसके साथ उसके माता-पिता और पत्नी रहते थे। रामनाथ के तीन बेटियाँ थी। एक की उम्र छ: वर्ष और दूसरे की उम्र चार और तीसरी दो वर्ष की थी। रामनाथ ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं था। रामनाथ को बस एक ही दु:ख था, वह चाहता था कि उसके एक पुत्र हो। वह इसी सोच में निरन्तर डूबा रहता था। इसके लिए वह अपनी पत्नी को तरह-तरह की बातें सुनाता था।
रामनाथ के माता-पिता उसे बहुत समझाते, परन्तु रामनाथ का पुत्र-मोह कम न होता।
रामनाथ अपनी बेटियों की पढ़ाई-लिखाई पर भी ध्यान न देता था। पत्नी के बार बार कहने पर वह अपनी बेटियों का दाखिला गाँव के सरकारी स्कूल में करा देता है।
रामनाथ की बेटियाँ बहुत होशियार थी। वह कक्षा में हमेशा प्रथम आती थीं। वार्षिक परीक्षा उत्सव में जब रामनाथ को बुलाया जाता तो रामनाथ कभी नही जाता और कोई न कोई बहाना बना देता। धीरे-धीरे समय बीतता गया। उसकी बेटियाँ बड़ी हो गईं। प्रतिवर्ष की भाँति उन्होंने हाई स्कूल, इण्टर और ग्रेजुएशन की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। लेकिन रामनाथ ने उनकी शिक्षा के बारे में कभी ध्यान न दिया और न ही कभी भी अपनी बच्चियों से ठीक से बात की। उसकी बेटियाँ घर का काम-काज भी करतीं और घर पर बैठकर पढ़ाई भी करती थीं। 
रामनाथ तो बस बेटों के गम में सदा उदास रहता। इस गम में वह अपनी बेटियों की प्रतिभा को भी न देख पाया।
आज रामनाथ खेत से लौटकर वापस आ रहा था। तभी वह देखता है कि गाँव के नुक्कड़ पर सभी उसे बधाई दे रहे हैं। वह पूछने लगा, "भाई! मुझे किस बात की बधाई दे रहे हो?" सभी ने बताया कि, "उसकी दोनों बेटियों की फोटो अखबार में छपी है। उन्होंने एक साथ डॉक्टरी की परीक्षा उत्तीर्ण की है।" रामनाथ को यह सब सपने जैसा लग रहा था, लेकिन जब उसने अखबार देखा तो उसे यकीन हुआ। वह भागता हुआ घर गया। अपनी बेटियों को गले लगा लिया। उसके आँखों से आँसू बहने लगे। वह बोला, "मैंने बचपन से ही तुम्हारी शिक्षा पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और तुम लोगों ने आज यह साबित कर दिया कि बेटियाँ भी बेटे से कम नहीं होती। आज तुमने मेरे साथ-साथ पूरे गाँव का नाम रोशन कर दिया। मैं बेटियाँ पाकर धन्य हो गया। बच्चों! तुमने मेरी सोच बदल दी। बेटियाँ सच में ईश्वर का उपहार होती है। उनसे परिवार में खुशियाँ छा जाती हैं।

#संस्कार_सन्देश -
हमें बेटा-बेटी में कोई भेद नहीं करना चाहिए। उन्हें शिक्षा के समान अवसर देने चाहिए। बेटियाँ भी इतिहास रच देती हैं।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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