83/2025, बाल कहानी- 09 मई


बाल कहानी - साफ सफाई का जादू 
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पूरे महँगऊ में आजकल बड़ी धूम मची हुई थी। एक जादू का खेल दिखाने वाला जादूगर सुल्तान अपने दल-बल के साथ आया था। पूरे गाँव को उसका जादू का खेल बहुत मनोरंजक लग रहा था। जादूगर कभी हवा में फूँक मारता तो अनगिनत चीजें धरती पर गिर पड़ती, कभी वह खाली टोपी से सुन्दर-सुन्दर फूल निकाल देता तो कभी सारी चीजों को अगली फूँक में गायब कर देता। जादूगर का खेल बच्चों को, खास तौर पर बहुत अच्छा लग रहा था। 
एक दिन राजू और मुनिया भी नानी से अनुमति लेकर जादू के आखिरी शो के बाद जादूगर से मिलने गये। सुल्तान जादू का खेल दिखाते-दिखाते बहुत थक गया था, पर फिर भी वह बच्चों से बहुत प्यार से मिला। बच्चों ने पहले तो सुल्तान की तारीफ के पुल बाँधे, फिर आग्रह किया कि सुल्तान उन्हें भी जादू का खेल सिखा दे। सुल्तान दिल खोलकर हँसा और बच्चों से वादा किया कि, "कल वह उन्हें जादू का खेल अवश्य सिखायेगा।" क्योंकि कल एक शो कम होना था। बच्चे सारी रात सपने में जादू का खेल ही देखते रहे। 
सुबह होते ही उन्होंने अपनी दिनचर्या निपटाने के बाद स्कूल का रास्ता पकड़ा और वहाँ से सीधे जादूगर के पास जा पहुँचे। जादूगर को देखते ही बच्चे खुशी से चिल्लाने लगे, "जादूगर अंकल! हम आ गये। आप जादू सिखाओ न!" जादूगरने कहा, "ठीक है, बच्चों! चलो, जादू सीखने के साथ थोड़ी गाँव की सैर भी कर ली जाये।" बच्चे खुशी-खुशी साथ चल पड़े। रास्ते पर बहुत गन्दगी थी। कहीं कूड़े के ढेर पर मक्खियाँ भिनभिना रही थी, तो कहीं ठहरे हुए पानी पर मच्छर। पानी के स्रोतों के पास भी बहुत गन्दगी जमा थी। चिकित्सा केंद्र के बाहर भी बहुत भीड़ थी। कोई पेट दर्द से परेशान था तो कोई त्वचा रोगों से। मच्छर काटने से होने वाले रोगों से भी बहुत लोग परेशान थे। बच्चों ने जादूगर से कहा कि, "आप तो बहुत-कुछ कर सकते हैं तो फिर एक फूँक मारो और यह सब गन्दगी दूर हो जाये।" जादूगर हँसा, "हाँ, बच्चों! और गन्दगी के साथ यह सारे रोग भी, क्योंकि रोग की जड़ में गन्दगी ही तो होती है।" "तो फिर करो ना अंकल और हाँ, हमें तो आप यही जादू सिखा दो ताकि हमारा गाँव खूब सुन्दर और स्वच्छ रहे।" जादूगर ने गहरी साँस ली, "बच्चों! जादू तो मैं तुम्हें सिखाऊँगा, पर इसमें बहुत मेहनत और बहुत धैर्य की आवश्यकता होगी और हाँ! इस जादू में बहुत कुछ गायब हो जायेगा, पर हमेशा के लिए रहेगा एक स्वच्छ सुन्दर गाँव। 
"तो फूँक मारना सिखाओ ना अंकल!" 
"अरे हाँ! इस जादू में फूँक मारेगी हमारी झाडू। गायब होगी गन्दगी जो मिलेगी जाकर कूड़ेदानों में। कूड़ेदानों से भी कूड़ा गायब होकर ठेलों पर पहुँचेगा और वहाँ से भी गायब होकर मैदान के खुले हुए गड्ढों में, जिन्हें हम मिट्टी से ढक देंगे और जो जादू से बदल जायेगा खाद में। पशुओं के गोबर से जो गन्दगी होती है, वह गोबर गैस-प्लांट में गोबर पहुँचाने से दूर होगी। बदले में मिलेगा धुआं मुक्त ईंधन।" 
राजू और मुनिया उत्साह से रोमांचित हो उठे। समय निर्धारित किया गया और सफाई के जादू में गाँव के कई लोग सम्मिलित हुए। देखते ही देखते गाँव स्वच्छ होने लगा। गन्दगी और कूड़ा-गायब होने लगे। अस्पताल के बाहर भीड़ भी कम होने लगी। झाडू के जादू ने सचमुच कमाल कर दिया। लोगों के हँसते-खिलखिलाते चेहरे इस बात के गवाह थे।

#संस्कार_सन्देश -
स्वच्छता से सभी रोगों का नाश होता है। स्वच्छता वर्तमान का सच्चा धन है। यह निरोगता हेतु सर्वश्रेष्ठ औषधि है।

कहानीकार-
डॉ० #सीमा_द्विवेदी (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय कमरौली
जगदीशपुर, अमेठी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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