हम सब ही श्रमिक हैं

 हम सब ही श्रमिक हैं

बस बदले हैं परिधान।

कोई पहने सूट-बूट

कोई सीमा पर डटा सीना तान।

कोई जाता ऑफिस तक

कंधे पर लैपटॉप टांग।

कोई कंधों पर लादे ईंटें

करता है भवन निर्माण।

किसी की मेहनत शब्दों में 

किसी के हथौड़े में जान।

कोई ख्वाब बुने कारखाने में

कोई खेतों में सींचे अरमान।

सम्मान दो हर हाथ को

चाहे धूल हो या स्याही निशान।

सबका श्रम है पूजनीय

समझेगा अब सकल जहान।

नमन उन हाथों को जो

सपनों को देते हैं उड़ान।

जिनकी मेहनत के दम पर

होता है नित नव निर्माण।

नमन सभी मजदूरों को

उनके श्रम को दिल से प्रणाम।


रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या, 
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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