89/2025, बाल कहानी- 17 मई


बाल कहानी- शर्त
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भजन और गोपाल दो दोस्त थे। दोनों दोस्त गाँव में रहकर खेती-बाड़ी करते थे। दोनों में गहरी मित्रता थी। एक दिन गाँव में एक व्यक्ति के द्वारा अखण्ड रामायण का पाठ करवाया गया। पूरे गाँव ने प्रतिदिन जाकर कथा वाचन और कथा श्रवण का आनन्द उठाया।
कथा प्रवचन के दौरान कुछ कलशों में गेहूँ बोए गए थे। जब कथा का समापन हुआ तो पण्डित जी ने कहा, "समस्त सामग्री का किसी नहर में जाकर विसर्जन कर देना।" उसके पश्चात कथा का समापन हो गया।
सभी गाँव वालों ने सोचा कि सभी लोग मिलकर समस्त सामग्री का विसर्जन करने के लिए नहर पर जायेंगे। गाँव के ही श्रीराम के ट्रैक्टर पर समस्त ग्रामवासी सवार हो गये और नहर की तरफ चल पड़े।
भजन और गोपाल दोनों दोस्त भी इस ट्रैक्टर में बैठ गये। सभी लोग नहर पर पहुँचे और समस्त हवन सामग्री का विसर्जन कर दिया। नहर को देखकर कुछ युवक उसमें नहाने के लिए उतर गये। 
भजन और गोपाल भी दोनों नहर में उतर गये और नहाने लगे। गोपाल ने भजन से कहा," तुम कितने गहरे में जा सकते हो?" भजन ने कहा, "मैं बहुत आगे तक जा सकता हूँ।" गोपाल ने कहा, "तो जाकर दिखाओ।" ऐसा कहकर भजन गहरे पानी में जाने लगा और अन्दर गड्ढे में उसका पैर धँसने लगा और वह डूबने लगा। इस पर गोपाल चिल्लाया, "अरे! भजन डूबने लगा, उसे बचाओ!" गाँव के लोगों का ध्यान उस ओर गया। उसमें से जो लोग तैर लेते थे, वह तुरन्त नहर में छलाँग लगाकर भजन को निकाल कर लाये।
भजन की जान बच गई थी। गोपाल को अपनी गलती का एहसास हुआ। सभी गाँव वालों ने समझाया कि, "इस तरह उत्साह में नहर में छलाँग नहीं लगानी चाहिए। यदि कोई मौजूद नहीं होता, तो जान जा सकती थी। 
थोड़ी देर बाद में भजन सामान्य हो गया और सभी लोग ट्रैक्टर में सवार होकर वापस अपने गाँव की तरफ चल पड़े। भजन रास्ते में सोच रहा था कि आगे से वह कभी भी किसी से शर्त नहीं लगायेगा। शर्त में बर्बादी ही लिखी होती है। सब लोग गाँव में पहुँच गये थे और सब अपने-अपने घरों को चले गये। 

#संस्कार_सन्देश -
हमें कभी भी आग, पानी से नहीं खेलना चाहिए।"

कहानीकार-
#शालिनी (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय- रजवाना 
विकासखण्ड- सुल्तानगंज 
जनपद- मैनपुरी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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