85/2025, बाल कहानी- 13 मई


बाल कहानी - देश प्रेम
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मसान नामक गाँव में एक शर्मा परिवार रहता था। वहाँ एक नानकी नाम की बूढ़ी काकी रहती थी। सभी बड़े एवं बच्चे उसे काकी के नाम से पुकारते थे। काकी भी सभी बच्चों को बहुत प्यार करती थीं। काकी थोड़ी पढ़ी-लिखी थी इसलिए वह शाम के समय सभी को पढ़ाया करती थीं। गाँव के सभी लोग साक्षर हो चुके थे।
एक दिन रामू काका, जिनका बेटा भारतीय आर्मी में था, के पास उनके बेटे के शहीद होने की सूचना आई। सूचना पाकर पूरा परिवार टूट गया। उनके बेटे की शादी अभी पिछले वर्ष ही हुई थी। बहु रिंकी के ऊपर तो जैसे पहाड़ ही टूट गया था। जल्दी ही उसने अपने आप को सँभाला और उसने घर में सबसे बात करके स्वयं भी आर्मी ज्वाइन करने की इच्छा जाहिर की। रामू काका उसे ऐसा करने के लिए मना कर रहे थे लेकिन रिंकी के अन्दर देश-प्रेम कूट-कूट कर भरा था। शादी से पूर्व भी वह सेना में भर्ती होना चाहती थी। शादी के बाद यह बात उसने अपने पति से भी कही थी। उसने कहा था, "एक बर्ष बाद में तुम्हें स्वयं ज्वाइन करा दूँगा। भारत हमारी माता है और हमें सदैव अपनी माता की रक्षा करनी चाहिए।" रिंकी ने यह बात जाकर काकी को बतायी और कहा, "काकी! मुझे अपने देश के लिए कुछ करना है।" काकी ने कहा, "वो तो ठीक है लेकिन हम किसी और तरीके से भी अपने देश के लिए कुछ कर सकते हैं।"
रिंकी बहुत उदास मन से रहने लगी। एक दिन उसके पति के मित्र घर आये और बोले, "रिंकी जी! अभी सेना में भर्ती चल रही है, आप ज्वाइन कर लीजिए।" रिंकी ने कहा, "नहीं! मै नहीं ज्वाइन कर सकती।" उसने बोला, "रोहन (उसका पति) तो कहता था कि आप सेना में भर्ती होना चाहती हैं।" तब रिंकी ने सारी बात बतायी। रोहन के दोस्त ने जाकर सभी घर के लोगों से बात की और समझाया, "आप सभी लोगों को बताना चाहता हूँ कि हमें देश के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। अगर हमारे घर या गाँव में कोई मुसीबत आती है ‍तो हम सब मिलकर उसका सामना नहीं करते है क्या ?"
घर वालों को बात समझ तो आयी, लेकिन बोले, "ये तो लड़की है और हम पहले ही अपने बेटे को खो चुके हैं।" तब रोहन के मित्र ने समझाया कि, "एक दिन तो सभी को जाना है, लेकिन अगर सभी ऐसा करके देश की रक्षा करते हुए शहीद होते हैं तो हमें गर्व करना चाहिए और फिर आज लड़कियाँ किसी काम में पीछे नहीं हैं। अगर रिंकी फौज में जाना चाहती है तो हमें उसे रोकना नहीं चाहिए। जरूरी नहीं कि हर कोई शहीद ही हो।"
बस क्या था! रिंकी सभी की इच्छा से फौज में भर्ती हो गयी। 
कुछ ही समय में उसने देश के लिए बहुत ही प्रशंसनीय कार्य किए, जिसके लिए भारत सरकार ने उसे और उसके परिवार बालों को सम्मानित भी किया। सभी ने एक साथ 'जय हिंद' का नारा लगाया।

#संस्कार_सन्देश-
सच! देश की रक्षा के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए। आज के समय में बेटा-बेटी दोनों ही किसी भी कार्य में पीछे नहीं हैं।

कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल (स०अ०)
सेमरुआ, सरसौल, कानपुर नगर

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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