79/2025, बाल कहानी- 05 मई
बाल कहानी - खेल बनाम स्वास्थ्य
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शाहपुर नामक गाँव में एक उच्च प्राथमिक विद्यालय था, जिसमें लगभग गाँव के सभी बच्चे पढ़ते थे। बच्चे सभी प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग भी करते और स्थान प्राप्त कर पुरस्कार भी प्राप्त करते थे।
आजकल बहुत गर्मी पड़ने के कारण बच्चे मैदान में खेल नहीं पाते थे। बच्चे बहुत उदास रहने लगे। उन बच्चों में रघु नाम का एक बच्चा था, जो क्रिकेट बहुत अच्छा खेलता था। पिछले माह उसका चुनाव ब्लॉक स्तरीय टीम में हो गया था। अब वह अपना अभ्यास नहीं कर पा रहा था। दो माह के बाद उसकी प्रतियोगिता जनपद स्तर पर होनी थी, जिसके लिए वह जी-तोड़ अभ्यास करना चाहता था। लेकिन मैदान न मिलने के कारण वह असमर्थ था।
उसके मन एक विचार आया कि वह क्यों न अपनी मैडम जी से बात करके शाम के समय अभ्यास करने की स्वीकृति ले ले। रघु ने अपनी अध्यापिका से कहा, "मैडम! मैं स्कूल के बाद मैदान में अभ्यास कर सकता हूँ?" अध्यापिका जी ने उसका उत्साह और लगन देखकर कहा, "हाँ, बेटा! क्यों नहीं, तुम बिल्कुल अपना अभ्यास कर सकते हो।" बस क्या था! रघु बहुत मेहनत से अभ्यास करने लगा। वह इतना थक जाता था कि अपनी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहा था। परिणाम यह हुआ कि वह कक्षा में पढ़ाई में बहुत पीछे हो गया। तब सबने उसे समझाया कि, "जीवन में सब कुछ बहुत जरूरी है। अतः हमें पढ़ाई और खेल दोनों को पर्याप्त समय देना चाहिए।"
बस क्या था! रघु पढ़ाई पर भी ध्यान देने लगा और खेल पर भी। वह निरन्तर खेल प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग करता। वह इतनी गर्मी में, जब विद्यालय में ग्रीष्मकालीन अवकाश होता तो दिन-भर धूप में भी क्रिकेट का आभास करता रहता। उसके निरन्तर प्रयास से क्रिकेट में वह काफी अच्छा हो गया। लेकिन इतनी तेज धूप में दिन-भर खेलने से उसकी तबियत बहुत खराब हो गई। उसे पानी की कमी हो गई। अब उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। साथ ही जब अगले हफ्ते प्रतियोगिता में भी प्रतिभाग नहीं कर सका। उसे बहुत ज्यादा कमजोरी आ चुकी थी।
तब उसकी अध्यापिका ने समझाया, "किसी भी काम को समय से और मौसम को देखकर ही करना चाहिए। अब तुम्हारी तबियत खराब हो गई और तो और तुम्हारा दोहरा नुकसान भी हो गया।" तब रघु को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने वादा किया और कहा, "मैं अगले वर्ष इन बातों का ध्यान रखते हुए ही प्रयास करूँगा।"
अगले वर्ष उसने ऐसा ही किया और उसका चुनाव जनपद की टीम में हो गया।
#संस्कार_सन्देश -
सच! हमें किसी भी काम को करने से पूर्व अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए।
कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल
उच्च प्रा० वि० सेमरुआ,
सरसौल (कानपुर नगर)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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