बसंत

हटाने को कोहरे की चादर

दिनकर ने रफ्तार बढ़ाई

हुआ ॠतु परिवर्तन

प्रकृति में हरियाली छाई। 


मानो सूर्य की स्वर्णिम रश्मियों से

हो रहा धरती माँ का श्रृंगार, 

पुष्पों के आभूषण पर

हो रहा हर दिल न्योछावर। 


हरियाली के बीच पीली-पीली सरसों

लगा रही खेतों में चार चाँद, 

प्रकृति का सानिध्य

दे रहा बसंत का पैगाम। 


हो रहा कण-कण झंकृत

माँ शारदे की वीणा से, 

गूँज रही सरगम की धुन

धरती अंबर के कण-कण में।।


रचयिता
अर्चना गुप्ता,
प्रभारी अध्यापिका, 
पूर्व माध्यमिक विद्यालय सिजौरा,
विकास खण्ड-बंगरा,
जिला-झाँसी।

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