26/2024, बाल कहानी- 19 फरवरी


बाल कहानी- लिली और गौरैया

एक बार की बात है। लिली नाम की एक छोटी लड़की थी, जिसे पक्षियों से बहुत प्यार था। वह अपना खाली समय पक्षियों के बारे में किताबें पढ़ने, चित्र देखने और अपने घर के पीछे बने बगीचे में बिताती थी। वह अक्सर यह सोंचकर दुःखी हो जाती कि आज के समय में लगातार काटे जा रहे जंगलों से सभी पशु-पक्षी अपना‌ आश्रय खोते जा रहे हैं। 
लिली के भाई मगन को चिड़ियों को ढेला मारकर उड़ाने में मज़ा आता। कभी अगर किसी चिड़िया का घोंसला दिख जाये, तो मगन उनके अण्डे छूने की कोशिश करता, जबकि लिली उसे ऐसा करने से मना करती और समझाती थी कि-, "उसने पुस्तकों में पढ़ा है कि अगर पक्षियों के घोंसले में रखे अण्डे किसी ने छू लिये, तो फिर इसके बाद चिड़िया उनको सेती नहीं है। हमारी ही तरह पशु-पक्षियों में भी संवेदनशीलता होती है। वे सब भी स्नेह व प्यार की मौन भाषा को समझते हैं। हमें अनावश्यक उन सभी को परेशान नहीं करना चाहिए, पर मगन नहीं सुनता था।
एक दिन जब लिली बगीचे में खेल रही थी, तो उसने देखा कि एक गौरैया किसी तरह घायल होकर नीचे पड़ी दर्द से कराह रही थी। लिली ने सोचा कि उसे गौरैया की मदद करनी है, इसलिए वह सावधानी से उसके पास गयी और धीरे से उसे अपने हाथों में उठाया और घर ले आयी। माँ से कहकर उस गौरैया को डाॅक्टर के पास ले गयी। जहांँ उस गौरैया के लिए अच्छी दवाएँ दी गयीं। बहुत जल्दी ही वह गौरैया ठीक होने लगी थी। लिली ने सोचा था, कि ठीक होते ही वह वापस उड़ जाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ। गौरैया पूरी तरह स्वस्थ होकर भी लिली के आस-पास ही घूमती रहती। शायद उसे जंगल से अधिक लिली का घर सुरक्षित लगने लगा था। लिली के प्रति गौरैया का लगाव देखकर मगन को भी समझ में आ चुका था कि ये भोले पक्षी भी प्रेम की भाषा अच्छी तरह समझते हैं। अब उसने भी तय किया कि कभी किसी पशु-पक्षी को नहीं सतायेगा।

संस्कार सन्देश-
पशु-पक्षी भी साथ प्यार और स्नेह की भाषा समझते हैं। हमें उन सभी को परेशान नहीं करना चाहिए।

✍️👩‍🏫लेखिका-
शिखा वर्मा (इं०प्र०अ०)
उ० प्रा० वि० स्योढ़ा
बिसवाँ (सीतापुर)

✏️संकलन
📝टीम मिशन शिक्षण संवाद
नैतिक प्रभात

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