विश्व शरणार्थी दिवस

जिनका नहीं होता कोई आवास,

शरणार्थी होने का रहता है आभास।

घर ना होने की पीड़ा घेरे रहती है,

पर कभी नहीं टूटता उनका विश्वास।।


इन्हीं शरणार्थियों का होता है एक दिवस,

20 जून को मनाते हैं उनके लिए दिवस।

जागरूकता बढ़ाने को समर्पित है यह दिन,

4 दिसंबर 2000 संयुक्त राष्ट्र ने घोषित किया दिवस।।


युद्ध, आतंक और संघर्ष से बचने को पलायन,

करना पड़ता है जान बचाने को मजबूरन।

इतने के बावजूद साहस, लचीलापन नहीं खोते,

अधिकारों और सपने की उड़ान को चाहते गगन।।


प्राकृतिक आपदाएँ भी बेघर कर जाती हैं,

जीवन पर संकट बन सदा मंडराती हैं।

इनकी रक्षा करने का दिलाओ एहसास,

विस्थापित करने की बात आस बँधा जाती है।।


"हम साथ मिलकर चंगा करें, सीखे और चमकें",

2021 की इस थीम पर हम सब सोचें।

"सुरक्षा की तलाश का अधिकार" इस वर्ष की थीम,

शरणार्थियों को सुरक्षा दें ताकि चेहरे उनके दमकें।।


रचयिता

नम्रता श्रीवास्तव,

प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय बड़ेह स्योढ़ा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।


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