नमन मिल्खा

मौत ने एक और बाजी जीती

जिंदगी फिर से हार गई।

फिर हमने एक हीरा खोया

दुःख ने अपने गम में डुबाया।

दौड़ते कदमों ने विराम लिया तो!!

थम गई जैसे दुनिया सारी।

महाबली था सूरमा, थी चीते सी चाल।

डरते दुश्मन ट्रैक पर, उतरे धरती का लाल।

नंगे पैर भी दौड़ कर करते थे वो कमाल

लगन और मेहनत से करते दुश्मन को भी बेहाल।

जुनून और जज्बे की थे, अनोखी मिसाल,

गुरबत में भी हार ना मानी करते रहे कमाल।

नाम अमर कर गए देश का एथलीट थे वो कमाल।

बिजली बनकर दौड़ते कहलाये "उड़न सिक्ख'  बेमिसाल।

देश का ऊँचा नाम किया

तमगे और खूब इनाम लिया

सच्चा सिपाही खेल का

ट्रैक पर किया धमाल,

अंत समय मैदान में उतरा थी आखिरी ये दौड़!!!

जग को फुर्ती से जीतने वाला!!!

गया मौत से हार।

नमन करे उस वीर को

खेल जगत के कोहिनूर को

भारत रत्न शिरोमणि को

कोटि-कोटि प्रणाम।।


रचयिता

मंजरी सिंह,

प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उमरी गनेशपुर,
विकास खण्ड-रामपुर मथुरा,
जनपद-सीतापुर।



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