प्यारे पापा

पापा आज बहुत याद आये मुझे।

आँखें बहती रहीं याद करके तुझे।

मन में बहुत सारे  प्यारे लम्हों की‌ यादें जुड़ी,

बचपन के हर पल आज याद आए मुझे।


आज ‌आँखों ‌से आँसू थमते नही ।

 मन है भारी बहुत, आँसू रूकते नहीं।

तुम कहाँ छोड़कर मुझे चले गए,

जिसका कोई पता  ठिकाना नहीं।


मेरे जीवन में खुशियाँ सदा भरीं आपने।

 पूरा करते रहे मेरे हर सपने।

अपने हिस्से की खुशी आपने दी सदा,

गम में भी सदा मुस्कुराते  हुए सामने।


संरक्षक मेरे, मार्गदर्शक मेरे।

प्रेरणा सारथी मेरे, विधाता मेरे।

प्रेरणा जो मिली हौंसला बुलन्दी की मुझे,

उसकी सबसे बड़ी, पृष्ठभूमि मेरे।


यूँ तो हर पल  तेरी, याद आती मुझे।

पर पितृ दिवस बहुत रुलाता मुझे।

एक उपहार भी न दे सकी  मुन्नी तेरी,

इतना जल्दी क्या थी? छोड़कर  जाना तुझे।

पापा आज बहुत याद आये मुझे.............


रचयिता
बिधु सिंह, 
एआरपी हिन्दी, 
विकास खण्ड-बिसरख,               
जनपद-गौतमबुद्धनगर।

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