४६- सौरभ गुप्ता, प्रा० वि० जगन्नाथपुर-२, औराई, भदोही

मित्रों आज हम फिर एक बार परिचय के इस क्रम में आगे बढ़ते हुए जनपद- भदोही के सकारात्मक सोच और ऊर्जा के प्रतीक शिक्षक भाई सौरभ गुप्ता जी के पास चलते हैं जिन्होंने इस अपने शिक्षक जीवन में नई सोच के साथ सतत आगे बढ़ने का मंत्र अपनाया और हम सबको उसका अपने विद्यालय में सफल प्रयोग कर दिखाया।
तो आइये जानते आपकी सोच को---
मित्रों,
             मिशन संवाद ------एक अच्छी पहल  है, मैं काफी दिनों से सोचता था कि एक ऐसा ग्रुप हो जिसमें कूछ नया करने कि सोच हो, मैंने अपने सभी नवाचारों को एक नाम दिया है---
"एक नयी सोच"
मैंने जो भी बातें अपने विद्यालय के लिये सोचा उसे पूर्ण किया।
1-  मैं 14 अगस्त-2014 को आजादी के जश्न के एक दिन पहले प्राथमिक विद्यालय जगन्नाथपूर- 2 में नियुक्त हुआ। अगले ही दिन आजादी का त्यौहार मनाया गया। लेकिन स्कूल का माहौल देखकर मैं दुखी था, क्योंकि जश्न सिर्फ लड्डू खिलाने तक सीमित था। स्कूल का हैण्डपम्प 2 हफ्तों से खराब था, पहला टारगेट हैण्डपम्प 2 दिन बनवाया। फ़िर मूझे ये महसूस हो गया कि मैं इस स्कूल के लिये बहुत कुछ कर सकता हूँ, फ़िर क्या था मैं बढ़ गया अपनी सोच को लेकर।
2- विद्यालय परिवेश में परिवर्तन के लिये मैंने टारगेट किया स्कूल के बच्चों को, कि वे प्रतिदिन यूनिफॉर्म में आयें। फ़िर मैंने ये ओब्ज़र्व किया कि बच्चे गरीब घरों या दलित परिवारों के हैं जिनके परिवार कि आमदनी काफी कम है और जिनकी आमदनी है भी  वह दारू के नशे में हैं, जिसकी वजह वह स्कूल यूनिफॉर्म घर पर पहनते है, स्कूल गंदे कपड़ों में आते हैI फ़िर क्या था मैंने अपने परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों और कपड़े की दुकान से ऐसे सस्ते कपड़े इकट्ठे किये, जो समयानुकूल ज़रूरत के नही थे और फैशन से बाहर हो गये या छोटे हो गये थे। मैंने स्कूल आने वाले सभी बच्चों को उनकी ज़रूरत के हिसाब से बाँट दिये।  फ़िर अगले दिन बच्चों से ये कहा कि अब आप सभी यूनिफॉर्म में आना, इसका असर ये हुआ कि जो बच्चे स्कूल कभी नहीं आते थे वह भी कपड़ों के लालच में आने लगेI नतीजा ये है कि सभी बच्चे यूनिफॉर्म में आज भी आते हैं।
3- स्टाफ की संख्या मेरे विद्यालय कि उस समय दो थी, मैं और मेरे विद्यालय कि सहायिका,  इंचार्ज हेड मास्टर दूसरे विद्यालय में अटैच थे। आज मेरे विद्यालय में हेड मास्टर के साथ हम सभी हैं।
4- छात्रसंख्या उस समय 156 थी पर इसमें ऐसे भी बच्चे थे जो अन्यत्र पढ़ते थे, मेरा टारगेट ये था कि बच्चो को स्कूल के लिये प्रेरित किया जाये, लेकिन सच्चाई ये थी फर्जी नामांकित बच्चों को कहाँ से लाऊँ फिर क्या था, सत्र के अंत में ऐसे बच्चों का नामांकन रद्द किया गया और सही संख्या के रुप में 105 बच्चों को रखा गया। नतीजा ये है कि अब  75% उपस्थिति आज भी बरक़रार है।
5-विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था के लिये मैंने बच्चों को पहले वही बातें सिखायी जो उन्हें आनी ही चाहिए थी। शिक्षण गतिविधियाँ और नवाचारों के लिये मैंने ये सोच रखा था कि मेरे विद्यालय के सभी बच्चे बेंच पर बैठे, मेरे इस सोच के लिये मेरे विद्यालय के सभी स्टाफ ने पूर्ण रुप से सहयोग किया, फलतः आज मेरे विद्यालय मे 22 सेट डेस्क बेंच है। मिड डे मील के लिये मैंने अपनी सोच में सभी बच्चों के लिये थाली, गिलास और चम्मच कि व्यवस्था प्राथमिकता के तौर पर किया। क्योंकि बच्चों के बैग में कॉपी किताब कि जगह बरतन ना रहे।
6- मूझे nprc स्तर पर शैक्षणिक नवाचार के लिए प्रथम सम्मान दिया गया और समाज से मुझे हमेशा प्यार और सम्मान मिलता रहा है।
7- अन्य शिक्षकों के लिए मेरा संदेश और सुझाव--- आप सभी शिक्षक "एक नयी सोच" को प्रेरित कर सकते हैं, फर्क ये है हमारे सोचने का  नज़रिया बदलना चाहिये, जिससे समाज और शिक्षकों में सकारात्मक सोच के प्रति जागरूकता बढ़े। हम शिक्षक ही समाज सुधारक है, हमें मिलकर आगे आना चाहिए।

आपका अपना शिक्षक                  सौरभ गुप्ता (स अ)
प्रा○ विद्यालय जगन्नाथपुर- 2, बलॉक औराइ, जनपद- भदोही
नई सोच के प्रतीक शिक्षक भाई सौरभ गुप्ता और उनके सहयोगियों को बहुत- बहुत शुभकामनाएँ!
☆मिशन संवाद☆
मित्रो यह एक शिक्षक से शिक्षक और शिक्षक से समाज के बीच अपने अच्छे कार्यों को पहुँचाने का माध्यम  मिशन संवाद है।
जिसका उद्देश्य एक दूसरे से संवाद के माध्यम से सीखना सिखाना तथा शिक्षा एवं शिक्षक के हित और सम्मान की रक्षा के लिए बेसिक शिक्षा से नकारात्मक माहौल को कम से कम करते हुए समाज के बीच बेसिक शिक्षा और शिक्षक के प्रति विश्वास पैदा करना है।
इसमें सहयोग के लिए आप स्वयं और अपने आसपास के गुमनाम शिक्षा के लिए काम करने वाले शिक्षकों और विद्यालयों की गतिविधियों और उपलब्धियों का फोटो सहित विवरण हमारे पास भेज कर शिक्षा एवं शिक्षक  सम्मान के भागीदार और रक्षक बनें। क्योंकि बुराई स्वप्रचारित होती है लेकिन अच्छाईयों को समाज के सामने लाने के लिए प्रयास करने पड़ते हैं। इसलिए आप भी अपना विवरण भेजने में संकोच न करें।
विवरण भेजने के लिए मिशन संवाद का WhatsApp No- 9458278429 है।
साभार: शिक्षण संवाद एवं गतिविधियाँ
आपका सहयोगी  शिक्षक
विमल कुमार
कानपुर देहात
29/06/2016

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