पढ़ने को मैं तो जाऊँ

मेरी मैया! कैसे तोय समझाऊँ, पढ़ने को मैं तो जाऊँ,   


मानत है नाय मेरो मनबा।।


ड्रेस संग किताबें मिलतीं और मिलता है खाना|

स्वेटर संग, जूते मिलते हैं, वहाँ जीवन का खजाना||

मैया! मैं तो खजाना लाऊँ, खोल के तुमको दिखाऊँ...


मुझको पढ़ने जाने दे तू मत रोक गैल हमारी|

भेदभाव तू क्यों कर रही है दुश्मन है या महतारी||

मैया! मैं भी भैया संग जाऊँ, पढ़ के तुमको दिखाऊँ...


बेटी बेटा में ना अंतर यह बात तोय समझाऊँ|

बेटा सँभाले एक घर मैं दो फर्ज अदा कर जाऊँ||

मैया! तेरा नाम रोशन कर जाऊँ, दिल में तुझको बसाऊँ...


दृढ़संकल्प हमारा है कुछ बनके तुझे दिखाऊँ|

बनूँ चावला, सुनीता विलियम्स हर जगह तिरंगा लहराऊँ||

मैया! मैं तो कुछ करके दिखाऊँ, देश को मान बढ़ाऊँ....


स्कूल मुझको लगे सुहानो जो जीवन की रेखा|

बड़े-बड़े अफसर निकले हैं आँखों से तूने देखा||

मैया! मैं तो अफसर बन जाऊँ, फिर गाड़ी में बैठ के आऊँ...


रचयिता

अजय विक्रम सिंह, 
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मरहैया,
विकास क्षेत्र-जैथरा,
जनपद-एटा।



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