दैनिक नैतिक प्रभात, संस्कार सन्देश,दिनांक- 20 - 09 - 2021, दिन-सोमवार, सूझ-बूझ


*🌹दैनिक नैतिक प्रभात🌹*
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_*🙏संस्कार सन्देश🙏*_
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*दिनांक*- *20 - 09 - 2021*
   *दिन*- *सोमवार*


*सूझ-बूझ*

            किसी गाँव में रोहित और अनुराग दो शरारती लड़के रहते थे। उनका रोज का यह नियम था कि दोपहर को जब माली घर चला जाता था, तब वे उसके बाग में जाकर अपने साथियों के साथ वहाँ के फल खाते, फूल तोड़ते और चारों ओर बिखेर देते थे। बाग का माली उन लड़कों की शरारतों से बहुत परेशान था। कभी वह लड़के सुबह तो, कभी दोपहर तो, कभी शाम को आ धमकते। 


           एक दिन बाग के माली ने पत्नी के सुझाव अनुसार, बाग से सब प्रकार के अलग-अलग फल तोड़कर अलग टोकरियों में इकट्ठे किए और जगह-जगह फूल बिखेर दिए। फिर माली खा-पीकर पेड़ की ऊँची डाल पर, घने पत्तों के बीच छिपकर बैठ गया। थोड़ी देर बाद बच्चे वहाँ आये। जैसे ही बच्चों ने रास्ते पर फूल देखे तो वे सोच समझकर सावधान हो आगे बढ़े। बाग में जाकर देखा तो कोई नहीं है! सब बच्चे अंदर आ गये। सभी बच्चों ने देखा कि बाग में जगह-जगह अनेक प्रकार के फल और फूल रखे हुए हैं। बच्चे फल खाने लगे फिर फूलों को एक-दूसरे पर डालकर खेलने लगे। 
           जब सभी बच्चे जाने को हुए, तभी उन्हें ऊपर से आवाज दी- "कहो बच्चे! फल कैसे लगे ? मीठे और स्वादिष्ट हैं न ? बच्चों ने डरकर इधर-उधर देखा तो कोई नहीं था। माली ने फिर पेड़ की डाल पर बैठे हुए कहा कि "डरो मत! मैं बाग का माली हूँ। मैंने ही यह फल यहाँ रखे हैं। अगर मुझे पहले से पता होता मैं रोज तुम्हारे लिए फल तोड़कर रख देता और स्वयं अपने हाथों से तुम्हें खाने के लिए देता।"बच्चे अभी भी डरे हुए थे। 
               माली झट पेड़ से नीचे उतरा और बच्चों के सामने खड़ा हो गया। रोहित बोला- "हमने आपका बहुत नुकसान किया है। हमें माफ कर दो, हमारे मम्मी पापा से शिकायत मत करना। "माली बोला - "नहीं बच्चों ! मुझे ऐसा करना होता तो, कभी का करता, लेकिन तुम अच्छे बच्चे हो, इसलिए मैंने तुम्हारे लिए फल रखे हैं। मैं तुम सबको रोज फल खिलाऊँगा"। सभी बच्चों ने कहा सच! "लेकिन मेरी एक शर्त है कि तुम सबको रोज स्कूल जाना होगा। रोहित और अनुराग बोले- "अगर हम स्कूल जायेंगे, तो रोज फल नहीं खा पायेंगे।केवल रविवार को ही यहाँ आ पायेंगे।" कोई बात नहीं! अगर आप हफ्ते में एक दिन आओगे तो तुम सबको अनेक प्रकार के अलग-अलग फल खाने को मिलेंगे, क्योंकि फलों को पकने में समय लगता है। "तब तो ठीक है!" सभी बच्चे  बोले-"पढाई भी और फल भी।" हाँ माली हंसकर बोला-"अच्छा अब तुम लोग घर जाओ और मन लगाकर पढाई करना। जो अधिक पढ़ेगा, उसे फल अधिक मिलेंगे।" "हम अधिक पढ़ेंगे, हम अधिक पढ़ेंगे" कहते हुए सब बच्चे चले गए।माली आज बहुत खुश था। उसने घर आकर अपनी पत्नी को धन्यवाद दिया।

*कहानी से सीख*--सूझ-बूझ से किया गया कार्य हमेशा सफल होता है और उससे दूसरे का भी भला होता है।

*कहानी निर्माणकर्ता* -जुगल किशोर त्रिपाठी,
शि.मि.प्रा.बि.बम्हौरी, मऊरानीपुर
, झाँसी,उ.प्र.

*संकलन* 
*दैनिक नैतिक प्रभात, मिशन शिक्षण संवाद*

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