97/2026, बाल कहानी- 22 मई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 97/2026
*22 मई 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी- #संकेत_का_परिवर्तन
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संकेत अपने माता-पिता का बहुत लाडला बेटा था। वह छोटी-छोटी बात पर गुस्सा हो जाता था। किसी की बात नहीं मानता था। गुस्से में जो भी चीज़ उसके हाथ में आती, उसे तोड़ देता या फेंक देता। उसकी इस आदत से उसके माता-पिता बहुत परेशान रहते थे।
कुछ समय बाद संकेत के घर एक छोटे भाई का जन्म हुआ। सभी लोग छोटे बच्चे पर प्यार लुटाने लगे। संकेत को यह अच्छा नहीं लगता था। वह अपने छोटे भाई को भी परेशान करता और उससे झगड़ता रहता था।
संकेत के पड़ोस में गिरीश और श्री नाम के दो सगे भाई रहते थे। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। वे साथ खेलते, साथ पढ़ते और हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे। मोहल्ले के लोग उनकी भाईचारे की भावना की खूब प्रशंसा करते थे।
एक दिन संकेत ने कुछ लोगों को कहते सुना, "देखो, गिरीश और श्री कितने अच्छे भाई हैं। दोनों में कितना प्रेम है! ऐसे बच्चे हर घर में होने चाहिए।"
यह सुनकर संकेत सोच में पड़ गया। उसे लगा कि लोग उसकी कभी प्रशंसा नहीं करते, बल्कि उसकी शरारतों और गुस्से की ही चर्चा करते हैं। उसे अपने व्यवहार पर शर्म आने लगी। उसे महसूस हुआ कि वह अपने छोटे भाई के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता।
उस दिन से संकेत ने स्वयं को बदलने का निश्चय किया। उसने अपने भाई से प्यार से बात करना शुरू किया। उसके साथ खेलता और उसकी देखभाल भी करने लगा। धीरे-धीरे उसका गुस्सा कम होने लगा और वह सबकी बातें मानने लगा।
संकेत के इस परिवर्तन को देखकर उसके माता-पिता बहुत खुश हुए। अब लोग उसकी भी प्रशंसा करने लगे। संकेत समझ गया कि प्रेम, सहयोग और अच्छे व्यवहार से ही सम्मान और स्नेह प्राप्त होता है।

#संस्कार_सन्देश-
बच्चों! गुस्सा और ईर्ष्या हमें सबसे दूर कर देते हैं, जबकि प्रेम और सद्भाव हमें सबका प्रिय बना देते हैं।

कहानीकार-
#पुष्पा_पाठक (अध्यापिका)
शासकीय माध्यमिक शाला
डेराञपहाड़ी, छतरपुर (म०प्र)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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