96/2026, बाल कहानी- 21 मई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 96/2026
*21 मई 2016 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी- #ईंटों_में_छिपा_गणित
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एक सुहानी सुबह थी। स्कूल की घन्टी बजी, लेकिन आज कक्षा में कुछ अलग होने वाला था। गुरू जी मुस्कुराते हुए बोले, “बच्चों! आज हम किताब नहीं खोलेंगे… आज हमारी किताब होगी- यह स्कूल की इमारत!”
बच्चे उत्साहित होकर बाहर आये। सामने खड़ी थी- बड़ी-सी दीवार, जो छोटी-छोटी ईंटों से बनी थी। गुरू जी ने पूछा, “बताओ, इसमें कितनी ईंटें होंगी?”
बच्चे एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे। तभी नन्हा गौरव बोला, “सर! हम गिन सकते हैं!”
सब बच्चे खुशी-खुशी गिनने लगे। कृष्णा ने कहा, “सर, एक पंक्ति में दस ईंटें हैं।”
विवेक बोला, “और ऐसी पाँच पंक्तियाँ हैं!”
गुरू ने मुस्कुराकर पूछा, “तो कुल कितनी ईंटें?” बच्चे सोच में पड़ गए। तभी गुरू जी ने समझाया, “जब एक ही संख्या बार-बार जुड़ती है, तो हम गुणा करते हैं।”
सभी बच्चों ने मिलकर जोर से कहा, "10 × 5 = 50
“वाह!” बच्चे खुशी से उछल पड़े। अब उन्हें गणित खेल जैसा लगने लगा था। फिर गुरूजी ने एक ईंट हाथ में उठाई और बोले,
“देखो, यह ईंट घनाभ है—इसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊँचाई अलग-अलग होती हैं।”
उन्होंने जेब से एक पासा निकाला और कहा, “और यह घन है, इसकी तीनों भुजाएँ बराबर होती हैं।” अब बच्चों को अन्तर भी समझ आ गया। अन्त में गुरू जी बोले,.“बच्चों! जैसे ये छोटी-छोटी ईंटें मिलकर बड़ी इमारत बनाती हैं, वैसे ही छोटे-छोटे बातें सीखकर हम बड़े बनते हैं।”
बच्चों ने एक स्वर में कहा, “आज का गणित तो बहुत मजेदार था!”
#संस्कार_सन्देश -
गणित केवल किताब में नहीं, हमारे आस-पास भी है। गुणा से गिनती आसान हो जाती है। छोटी-छोटी सफलता मिलकर बड़ी सफलता बनाती है।
कहानीकार -
#माधव_सिंह_नेगी (प्र०अ०)
राजकीय प्राथमिक विद्यालय जैली
प्रखण्ड- जखोली, रुद्रप्रयाग
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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