86/2026, बाल कहानी- 09 मई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 86/2026
*09 मई 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #नन्हे_कदम_बड़ी_उड़ान
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सुन्दरपुर गाँव में एक छोटा सा लड़का रहता था- छोटू। 
छोटू का मन बहुत चंचल था, लेकिन उसे लगता था कि स्कूल जाना एक बोझ है। वह सारा दिन धूल में खेलता, पेड़ों पर चढ़ता और तितलियों के पीछे भागता। उसके माता-पिता मेहनत-मजदूरी करते थे, इसलिए वे भी उसे स्कूल भेजने के लिए ज्यादा जोर नहीं दे पाते थे।
एक दिन सुबह-सुबह गाँव में ढोल-नगाड़ों की आवाज सुनाई दी। छोटू दौड़कर घर से बाहर आया। उसने देखा कि स्कूल के मास्टर जी, गाँव के सरपंच और बहुत सारे बच्चे रंग-बिरंगे झण्डे लेकर आ रहे थे। वे नारे लगा रहे थे-
"आधी रोटी खाएँगे, स्कूल जरूर जाएँगे!"
"पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया!"
यह 'स्कूल चलो अभियान' की टोली थी। मास्टर जी छोटू के घर के पास रुके और प्यार से बोले, "छोटू! तुम स्कूल क्यों नहीं आते? देखो, तुम्हारे सारे दोस्त वहाँ नई-नई बातें सीख रहे हैं।"
छोटू ने शरमाते हुए कहा, "मास्टर जी! स्कूल में तो सिर्फ पढ़ाई होती है, मुझे तो खेलना पसन्द है।"
मास्टर जी मुस्कुराए और बोले, "छोटू! एक बार कल स्कूल आकर तो देखो। अगर तुम्हें अच्छा न लगे, तो वापस आ जाना।" अगले दिन छोटू हिचकिचाते हुए स्कूल पहुँचा। वहाँ का नजारा देखकर वह दंग रह गया।
स्कूल की दीवारों पर सुन्दर पेंटिंग बनी थीं- कहीं पहाड़, कहीं फूल, तो कहीं चन्दा मामा। मैदान में बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे। क्लास में जाते ही उसे महकती हुई नई किताबें और चमकदार बैग मिला।
उस दिन मास्टर जी ने कोई भारी-भरकम पाठ नहीं पढ़ाया, बल्कि एक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटा-सा बीज मिट्टी के अन्दर से निकलकर एक विशाल पेड़ बनता है। 
छोटू को यह जानकर बहुत हैरानी हुई कि किताबों में दुनिया भर के जादू छिपे हैं। दोपहर को सभी बच्चों ने मिलकर खाना खाया। छोटू ने देखा कि उसके दोस्त जो स्कूल जाते थे, वे अब गिनती करना जानते थे और अखबार भी पढ़ लेते थे। उसके दोस्त राजू ने उसे बताया, "छोटू! पढ़ना सिर्फ परीक्षा के लिए नहीं है। जब हम पढ़ते हैं, तो हमें कोई धोखा नहीं दे सकता और हम बड़े होकर डॉक्टर, इंजीनियर या पायलट बन सकते हैं।"
छोटू की आँखों में चमक आ गई। उसने सोचा, "क्या मैं भी हवाई जहाज उड़ा सकता हूँ?"
शाम को जब छोटू घर लौटा, तो उसने अपने माता-पिता से कहा, "माँ, बापू! मैं कल से रोज स्कूल जाऊँगा। मुझे बड़ा आदमी बनना है और गाँव का नाम रोशन करना है।"
उसके माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उन्होंने समझ लिया कि 'स्कूल चलो अभियान' केवल एक रैली नहीं, बल्कि उनके बच्चे के सुनहरे भविष्य की शुरुआत है।

#संस्कार_सन्देश - 
एक पढ़ा-लिखा बच्चा एक सशक्त समाज की नींव होता है।

कहानीकार 
#नरेन्द्र_नाथ_पटेल (स०अ०)
कम्पोजिट विद्यालय सुरहन,
भदोही (उत्तर प्रदेश)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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