99/2026, बाल कहानी- 25 मई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात -
99/2026
*25 मई 2026 सोमवार)*
#बाल_कहानी - #सरला_की_जिद
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रामू गाँव में रहकर सिलाई का काम करता था। उसकी पत्नी रेखा भी उसकी मदद करती थी।
उनके परिवार मे दो बच्चे और माता पिता थे।
रामू का बेटा अमन अभी पाँच साल का था। उसकी बेटी सरला स्वभाव से बड़ी चंचल स्वभाव की लड़की थी। वह खेल-कूद और पढ़ाई में बहुत अच्छी थी। उसकी उम्र बारह वर्ष की थी।
बस, उसकी एक ही बुरी आदत थी कि वह हर चीज के लिए अपने माता-पिता से जिद करती थी।
माता-पिता उसे बहुत प्यार करते थे इसलिए उसकी कही बात को हमेशा पूरा करने की कोशिश करते थे। भले ही वह अपने दैनिक खर्चों से कमी करें लेकिन अपनी बेटी की जिद पूरा करते थे। उसकी यह आदत दिनों-दिन दिन बढ़ती जा रही थी।
एक दिन की बात है सरला अपने स्कूल गई और उसने वहाँ पर अपनी सहेली के पास नई साइकिल देखी।
बस! फिर क्या था? घर आकर उसने खाना-पीना छोड़ दिया और मुँह फुलाकर बैठ गई।
दादी और माँ ने जब उसका कारण जानना चाहा तो उसने कुछ न बताया।
पिताजी जब घर आये तो उन्होंने बेटी से पूछा और सरला ने उन्हें सारी बात बतायी। पिता ने बेटी को समझाया, पर सरला ने उनकी एक बात न मानी और बिना खाना खाए ही सो गई।
रामू अगले दिन बाजार से साइकिल खरीद लाया। साइकिल देखकर सरला बहुत खुश हुई।
पत्नी ने जब रामू से पूछा, "एक साथ इतने पैसे कहाँ से आए? तो रामू ने उसे बताया कि, "मैने आड़े वक्त के लिए यह पैसे बचा कर रखे थे।
शाम को ही रामू की माँ की तबीयत खराब हो गई और अब उनके पास दवा के लिए भी पैसे नहीं थे क्योंकि जो पैसे रामू ने बचाकर रखे थे, उससे वह साइकिल ले आया था।
 रामू को अपनी माँ के इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत थी। दिन-भर वह पैसे के लिए भटकता रहा, पर किसी ने उसकी मदद नहीं की। शाम को वह अपनी पत्नी से उदास होकर बोला-, "हम मध्यम वर्गीय परिवार के लोग हैं। हमारे पास इतना पैसा नही होता। अब माँ का इलाज कैसे होगा? दोनों बहुत ही दु:खी थे। यह सब बातें उसकी बेटी सुन रही थी। अब उसे अपनी गलती का एहसास हो गया था। वह समझ गई थी कि हर चीज के लिए जिद जरूरी नहीं। इसके लिए उसने अपने माता-पिता से क्षमा माँगी और आगे से कभी भी किसी की चीज के लिए जिद न करने की कसम ली। माता-पिता ने उसे समझाया-, "बेटा! हमें अपनी आर्थिक स्थिति देखकर ही चीज लेना चाहिए। दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए।"

#संस्कार_सन्देश - 
 हमें जरूरत के हिसाब से ही चीज खरीदनी और लेनी चाहिए। दूसरों को देखकर मन में लालच नहीं आना चाहिए।

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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