79/2026, बाल कहानी- 30 अप्रैल
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 79/2026
*30 अप्रैल 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी- #चले_गए
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सुबह विद्यालय खुलते ही पहली कक्षा में कुछ दिन पूर्व नामांकित सुमित को अचानक नीचे रास्ते में शोरगुल सुनाई दिया। जिससे उसके साथ पढ़ रहे बच्चे व अन्य कक्षाओं के बच्चे भी उत्सुकतावश बाहर निकल, आ रही आवाज की ओर देखने लगे। अभी-अभी प्रार्थना पूरी होकर बच्चे कक्षाओं में गये ही थे कि शोरगुल सुनाई देने लगा था। सुमित ने पहली बार आज ही स्कूल से सटे हुए इस रास्ते में देखा! चार लोग एक बाँस से बनी छोटी-सी खाट, जिस पर लाल कपड़ा पड़ा है, उसे कन्धे पर ले जा रहे हैं और कुछ अन्य लोग उसके पीछे- पीछे जाते हुए राम सा कह रहे हैं। बच्चों के साथ शिक्षक भी अब बाहर निकल आये थे और उसकी ओर हाथ जोड़कर रुआँसे हो खड़े हो गये थे।
अपनी तोतली आवाज में सुमित ने टीचर से पूछा, "सर! यह क्या हुआ?"
शिक्षक ने बताया, "सुमन के दादा चले गए हैं।" और सर अन्दर चले गए। उनके पीछे सारे बच्चे भीतर जाकर अपनी-अपनी कक्षाओं में बैठ गए।
नन्हा सुमित मन ही मन सोचने लगा। जब से वह इस स्कूल में आने लगा था, तब से अक्सर रोज उसके साथ ही पढ़ने वाली नन्ही सुमन के दादा जी, सुमन को लेकर स्कूल में आते थे और कभी-कभी बच्चों को टाफियाँ भी देते रहते थे। वे सभी से कहते, "खूब पढ़ना बच्चों और कभी आपस में मत लड़ना।" छुट्टी के समय वह सुमन को लेने आ जाते। सुमन खुशी-खुशी उनकी गोदी में घर को जाती। परन्तु आज न तो सुमन और न ही उसके दादा जी विद्यालय आये और सर कह रहे हैं, "दादा! जी चले गए।" आखिर कहाँ गए होंगे वह? सोचता ही रह गया। उसने कक्षा के नन्हे बच्चों से भी पूछा लेकिन कोई कुछ नहीं बता पाया।
छुट्टी होने पर घर में पहुँचते ही सुमित ने अपनी माँ से पूछा, "मम्मी-मम्मी! सुमन के दादा जी कहाँ चले गए हैं?" मम्मी ने बताया, "बेटा! लोग बता रहे थे कि कल रात में उन्हें काफी तकलीफ हुई थी और थोड़ी देर बाद वह मर गए। शायद अटैक आया उन्हें। दादा जी अब आसमान में तारा बनकर चमकेंगे।" सुमित अब समझ पाया कि, 'चल दिए' का मतलब मर जाना था। उसे अब बहुत बुरा लगा। कितने अच्छे थे सुमन के दादा जी! अब कौन टाफियाँ देगा उन्हें स्कूल में? सोचते हुए रात को वह आसमान की ओर देखने लगा तो उसे जगमगाते हुए अनेक तारे दिखाई दिए। उसे एक तारे में अब सुमन के दादा जी की सूरत-सी दिखाई देने लगी जो कह रही हो, "बच्चों! खूब पढ़ाई करना, कभी आपस में मत लड़ना।"
#संस्कार_सन्देश -
दादाजी का स्थान हमारे हृदय के एक विशिष्ट कोने में सुरक्षित होता है, जिसकी कमी कोई भी पूरा नहीं कर सकता है।
कहानीकार-
#दीवान_सिंह_कठायत (स०अ०)
रा०आ० प्रा० वि० उडियारी बेरीनाग पिथौरागढ (उत्तराखण्ड)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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