92/2026, बाल कहानी- 16 मई

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 92/2026
*16 मई 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी- #राक्षस
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एक समय की बात है। एक घने जंगल में एक भयानक राक्षस आ पहुँचा। वह जंगल आस-पास के सभी जंगलों में सबसे अधिक हरा-भरा और सुन्दर था। वहाँ हर ओर शान्ति, खुशहाली और जानवरों की चहल-पहल रहती थी।
लेकिन एक राक्षस के आते ही पूरे जंगल में डर फैल गया। उसकी लाल आँखें और आग उगलती साँसें देखकर सभी जानवर भयभीत होकर अपने-अपने घरों में छिप गए।
एक हिरणी भी डरकर अपनी गुफा में जा छिपी। तभी बाहर से किसी छोटे बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। वह एक नन्हा खरगोश था, जो इतना छोटा था कि तेजी से भाग भी नहीं सकता था।
हिरणी ने खिड़की से झाँककर देखा। राक्षस पूरे जंगल में आग लगा रहा था। पेड़-पौधे जल रहे थे। चारों ओर धुआँ फैल चुका था।
हिरणी बहुत डर गई। उसने सोचा, “मैं इस राक्षस का सामना कैसे करूँ? मेरी ताकत उसके सामने कुछ भी नहीं।”
लेकिन तभी उसे उस छोटे खरगोश की मासूम मुस्कान याद आई, जो रोज जंगल में खेलते समय उसे देखकर हँसता था। उसे ऐसा लगा, मानो उसकी डरी हुई आँखें कह रही हों, “हिरणी दीदी! मुझे बचा लो।”
यह सोचते ही हिरणी के भीतर साहस जाग उठा। वह अपनी जान की परवाह किए बिना बाहर निकल आयी और उस बच्चे की ओर दौड़ पड़ी।
राक्षस की नजर जैसे ही हिरणी पर पड़ी, उसने आग की लपटें उसकी ओर फेंकी। हिरणी बुरी तरह घायल हो गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। वह फिर उठी और बच्चे तक पहुँचने की कोशिश करने लगी।
राक्षस बार-बार उसे रोकता, आग बरसाता, मगर हिरणी हर बार हिम्मत जुटाकर आगे बढ़ जाती।
आखिरकार हिरणी उस नन्हे खरगोश तक पहुँच गयी। उसने उसे अपनी पीठ पर बैठाया और जंगल के सुरक्षित हिस्से की ओर दौड़ पड़ी।
राक्षस गुस्से में दहाड़ने लगा और उनके पीछे भागा। तभी अचानक तेज हवाएँ चलने लगीं। काले बादल आसमान में छा गए और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। बारिश से जंगल की आग बुझने लगी।
बाकी जानवरों ने जब हिरणी की बहादुरी देखी, तो उनका डर भी खत्म हो गया। सभी बाहर आ गए और मिलकर आग बुझाने लगे। किसी ने घायल जानवरों की मदद की, तो किसी ने राक्षस पर पत्थर और लकड़ियाँ फेंकी।
सभी की एकता और साहस देखकर राक्षस डर गया। उसकी शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगी और अन्त में वह जंगल छोड़कर भाग गया।
राक्षस के जाते ही जंगल में फिर से शान्ति लौट आयी। पेड़ों पर पक्षियों की चहचहाहट गूँजने लगी।
नन्हे खरगोश ने हिरणी को गले लगाकर कहा, “आप सबसे बहादुर हैं।”
हिरणी मुस्कुराई। उसके शरीर पर घाव थे, लेकिन मन में खुशी थी कि उसने एक मासूम की जान बचा ली।
उस दिन जंगल के सभी जानवरों ने सीखा कि “सच्ची बहादुरी ताकत में नहीं, बल्कि दूसरों की मदद करने के साहस में होती है।”

#संस्कार_सन्देश-
अगर हममें परोपकार और सहयोग की दृढ़ आकांक्षा हो तो सभी परिस्थितयाँ हमारे अनुकूल हो जाति हैं।

कहानीकार-
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
उच्च प्रा० विद्यालय गजपतिपुर
बहराइच (उत्तर प्रदेश)

✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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