84/2026, बाल कहानी- 07 मई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 84/2026
*07 मई 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी- #दिलीप_मीनल_का_जल_संरक्षण
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एक सुन्दर से गाँव में दो अच्छे मित्र रहते थे- दिलीप और मीनल। दिलीप बहुत चंचल था, जबकि मीनल समझदार और प्रकृति से प्रेम करने वाली बच्ची थी। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे और साथ-साथ खेलते-कूदते थे।
गर्मी का मौसम था। सूरज बहुत तेज चमक रहा था। गाँव के तालाब का पानी धीरे-धीरे कम होता जा रहा था। लोग पानी की कमी से परेशान थे।
एक दिन दिलीप अपने घर के बाहर पाइप से पानी बहाकर खेल रहा था। वह पानी की बौछार से खुश हो रहा था, लेकिन बहुत सारा पानी व्यर्थ बह रहा था। तभी मीनल वहाँ आयी।
मीनल ने कहा, “दिलीप! इतना पानी क्यों बहा रहे हो? पानी बहुत कीमती है।”
दिलीप हँसकर बोला, “अरे मीनल! पानी तो बहुत है, थोड़ा बह भी गया तो क्या फर्क पड़ता है?”
मीनल ने गम्भीर होकर कहा,
“यदि हम आज पानी नहीं बचाएँगे, तो कल प्यासे रह जाएँगे। हमारे गाँव का तालाब भी सूख रहा है।”
दिलीप को मीनल की बात समझ नहीं आई।
अगले दिन स्कूल में उनकी अध्यापिका ने जल संरक्षण पर एक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया, “जल ही जीवन है। बिना पानी के पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य कोई भी जीवित नहीं रह सकता। हर बूँद कीमती है।”
अध्यापिका बच्चों को गाँव के सूखते तालाब के पास भी ले गईं। वहाँ फटी हुई जमीन और कम पानी देखकर दिलीप बहुत दु:खी हुआ। उसे अपनी गलती याद आई।
घर लौटकर उसने मीनल से कहा, “तुम सही कह रही थीं। मैंने बहुत पानी व्यर्थ बहाया। अब मैं पानी बचाऊँगा।”
मीनल मुस्कुराई और बोली,
“हम दोनों मिलकर पूरे गाँव को भी जल संरक्षण सिखाएँगे।”
फिर दोनों बच्चों ने मिलकर एक योजना बनायी।
नल खुला न छोड़ना। वर्षा जल संचयन करना। पौधों को बचा हुआ पानी देना। दूसरों को भी पानी बचाने की सीख देना।
उन्होंने स्कूल में “जल बचाओ अभियान” शुरू किया। सभी बच्चों ने पोस्टर बनाये।
“जल है तो कल है”
“पानी की हर बूंद बचाएँ”
धीरे-धीरे पूरे गाँव के लोग जागरूक हो गए। सबने पानी बचाना शुरू किया। वर्षा ऋतु आयी तो वर्षा जल संचयन से तालाब फिर भर गया। गाँव फिर से हरा-भरा हो गया।
गाँव के प्रधान ने दिलीप और मीनल की प्रशंसा करते हुए कहा, “इन बच्चों ने हमें सिखाया कि छोटी-सी समझदारी से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।”
दिलीप ने कहा, “अब मैं कभी पानी व्यर्थ नहीं बहाऊँगा।”
मीना बोली, “हम सबका कर्तव्य है- जल बचाएँ, जीवन बचाएँ।।
#संस्कार_सन्देश -
पानी प्रकृति का अनमोल उपहार है। हमें जल संरक्षण करके अपने भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहिए।
कहानीकार-
#पुष्पा_पाठक (अध्यापिका)
शासकीय माध्यमिक शाला डेरापहाड़ी, छतरपुर (मध्य प्रदेश)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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