94/2026, बाल कहानी- 19 मई

#बाल_कहानी- #सच्ची_दोस्त

मानवी और दीपाली दो पक्की दोस्त है। मानवी अपने मामा के गाँव बौखर में रहकर पढ़ाई कर रही है। दीपाली को मानवी दिप्पो कहकर पुकारती है। दोनों बौखर गाँव के एक मुहल्ले में रहती हैं। पढ़ाई में दोनों अव्वल है। दोनों प्राथमिक विद्यालय बौखर में कक्षा एक की छात्राएँ है। वे सदा अपने गुरूओं, माता-पिता का कहना मानती है और उनकी आज्ञा का पालन करती हैं। ग्राम बौखर में शनिवार के दिन गाँव का बाजार लगता है। आस-पास के गाँवों से सब्जी वाले व दुकानदार आते हैं और अपने साथ सामग्री लाकर बाजार लगाते हैं। दीपाली की माँ ने उसे सौ रूपये देकर बाजार से सब्जी लाने को कहा। दीपाली ने सब्जी का थैला उठाया और बाजार की तरफ चल दी। बाजार पहुँचकर उसने सबसे पहले ताजी मूली देखी और खरीदने का मन बनाया। उसने दस रूपये की चार मूली खरीदी। पैसे देने के लिए उसने जेब में हाथ डाले, किन्तु क्या? जेब में पैसे नहीं थे। उसे लगा कि पैसे रास्ते में कहीं गिर गये है। अब वो सब्जी कैसे खरीदेगी? उसे लगा कि माँ अब डाँटेगी और मारेगी भी। दीपाली जोर-जोर से रोने लगी। इधर मानवी भी अपनी नानी के साथ बाजार आई हुई थी। जब उसने दीपाली के रोने की आवाज सुनी तो भागकर वहाँ पहुँची। उसने दीपाली की सारी बात सुनकर अपनी नानी से जिद करके अपने हिस्से के पैसे दीपाली को दिलवा दिये। दीपाली खुश हो गई। इस प्रकार मानवी ने अपनी सच्ची दोस्ती का फर्ज निभाया। दीपाली और मानवी की नानी ने बाजार से सब्जियाँ खरीदीं और घर को लौट आये।

#संस्कार_सन्देश - 
दोस्ती एक निस्वार्थ और भरोसेमन्द रिश्ता है,जिसे इन्सान खुद चुनता है। दोस्त सुख-दुःख में साथ निभाते है और जीवन को सही दिशा देते हैं। सच्चा दोस्त मुसीबत में सहारा बनता है और जीवन भर साथ निभाता है। यह एक अनमोल बन्धन है।

कहानीकार
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बौखर
वि०क्षे०- सरीला, जनपद- हमीरपुर

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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