88/2026, बाल कहानी- 12 मई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 88/2026
*12 मई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - भाग्य और नियति
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भालू और नेवला बहुत गहरे मित्र थे। भालू नेवला को शिकार लाकर देता और नेवला जंगली साँपों से भालू की रक्षा करता। इस प्रकार बहुत दिन बीत गए।
एक बार भालू और नेवला कहीं दूर घूमने के लिए निकले थे। बहुत दिनों बाद उनका बाहर घूमने का मन हुआ था। वे दोनों गीत गाते, नाचते, उछलते-कूदते आगे बढ़ रहे थे। चारों ओर प्रकृति की छायी हुई हरियाली और फैल रही शीतलता तथा पुष्पों के मधुर झोंके मन को मुग्ध कर रहे थे। वे दोनों बढ़े ही जा रहे थे, मानो कोई उन्हें खींच रहा हो।
चलते-चलते नदी की कलकल ध्वनि सुनायी दी। नदी की शीतलता वातावरण को मादक कर रही थी। पास पहुँचने पर पता चला कि नदी में कुछ कन्याओं की हँसी का स्वर सुनायी दे रहा है। वे एक-दूसरे पर पानी और कमल पुष्प उछाल रही थीं तथा खिलखिलाकर हँस रही थीं। भालू ने जैसे ही उन कन्याओं को नहाते हुए नदी में देखा, वह प्रसन्न हो गया। आज तो बहुत सारा शिकार एक साथ मिल रहा है, वह भी इन गौरांगी नवयुवतियों का। कितना मधुर और स्वादिष्ट माँस होगा इनका।"
यह सोचकर जैसे ही वह आगे बढ़ा, उनमें से एक कन्या ने तत्क्षण परिस्थित भाँपकर उस भालू पर जल फेंका। जल के छींटे पड़ते ही भालू एक सुन्दर गन्धर्व वेश में परिवर्तित हो गया। उस रुपवान पुरुष को देखकर सभी कन्यायें उस पर मोहित हो गयी। वे कन्यायें उसे अपने नगर में ले गयीं। उसे राजा के समक्ष पेश किया गया। राजा के पूछने पर उसने अपने पूर्वजन्म का वृतान्त और एक ऋषि के श्राप और अनुग्रह का वर्णन किया। यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और उसने कहा, "मेरी पुत्री राजकुमारी भी श्रापित है। एक बार नदी में नहाते हुए ऋषियों की टोली वहाँ से निकली। निर्वस्त्र नहाती हुई सभी कन्याओं को देखकर ऋषि आँख मूँदे एक ओर खड़े हो गये। कन्याओं के नहाने के बाद परिचय जानकर ऋषियों ने उन्हें फटकारा और कहा, "राजकुमारी होकर भी तुम्हें लोक-लाज का भय और मर्यादा का ध्यान नहीं रहा। भला! ऐसी शिक्षा कहाँ दी जाती है। ये बिल्कुल अमानवीय व्यवहार है। यह मनुष्योचित नहीं हो सकता, इसलिए मैं तुम्हें श्राप देता हूँ कि तुम्हारा विवाह मनुष्य से न हो।" राजा ने फिर कहा, "अत: मेरी पुत्री का विवाह इस गन्धर्व पुरुष से ही हो सकता है। बिधाता ने इसे यहाँ स्वयं भेज दिया और श्राप मुक्त कर दिया।" राजा ने उसकी सुन्दरता व गुणों का अनुमान कर अपनी कन्या राजकुमारी का विवाह उससे करने का निर्णय लिया। राजा के कोई सन्तान नहीं थी। राजा के बाद वही सम्पूर्ण राज्य का उत्तराधिकारी घोषित हुआ।
#संस्कार_सन्देश-
बिना माँगे अचानक मिलना हमारे पुण्य कर्मों का उदय होना होता है। किन्तु पुरुषार्थ की कमाई स्थायी और फलदायी होती है।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
बम्हौरी, मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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