माँ

माँ इस एक शब्द में

पूरा ब्रह्मांड है।

माँ है तो जीवन 

लगता आसान है।

माँ अपने बच्चों की दुनिया 

माँ ही उनकी जान है।

माँ से जीवन में उजियारा

माँ बिन सूना जहान है।

माँ केवल ममता नहीं

हिम्मत है, पहचान है।

गिरकर फिर से उठना सिखाए

जीवन का वरदान है।

केवल जननी न है माँ

धरा भी तो माँ है।

पेड़ों की शीतल छाया में भी

माँ जैसी करुणा है।

जीवन दायक नदियाँ भी

करती जग कल्याण हैं।

उसकी मीठी सी एक दुआ

कर देती भाग्यवान है।

माँ त्याग है, माँ तपस्या है

माँ प्रभु का वरदान है।

जिस घर में माँ मुस्काती है 

वहाँ रहते खुद भगवान हैं।


रचयिता

डॉ0 निशा मौर्या, 

सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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