मातृ दिवस का भाव प्रसाद
दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती, माता में त्रए शक्ति।
कर! अनुसूया स्मरण, होती ऐसी भक्ति।।
माँ की ममता
सभी गुणों से श्रेष्ठ गुण, ममता जिसका नाम।
प्यार अलौकिक अमिय सम, माँ- कृतत्व निष्काम।।
माँ- कृतत्व! निष्काम, जीव का पोषक रक्षक।
करुणा शीलहु क्षमा-दया धारक संरक्षक।।
कहता कवि "निरपेक्ष", पावनी युगों-युगों से।
माँ की ममता श्रेष्ठ, रही है सभी गुणों से।।
'माता' शब्द भरोसा है, जिसका नहीं विलोम।
करुण शील निष्कामता, ममता रस है सोम।।
रचयिता
हरीराम गुप्त "निरपेक्ष"
सेवानिवृत्त शिक्षक,
जनपद-हमीरपुर।

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