माँ!
प्यारी मीठी मुस्कान लिए,
माँ जब तू घर में आती है;
खिल जाता घर जगमग जलता,
कोना-कोना महकाती है।
तेरी बिंदिया से मेरी माँ,
मेरी खुशियाँ मिल जाती हैं;
तेरी हँसती नन्हीं आँखें माँ,
दिल का गम चुरा ले जाती हैं।
गोद तेरी निंदिया का झूला,
सिर को ऐसे सहलाती है;
तेरी बोली कोयल मीठी,
मिश्री सी घुल मिल जाती है।
तेरा दिल ईश्वर का दिल माँ,
झरना बन प्रेम बरसाती है;
तुझसे समाज परिवार बना,
शांति का प्रतीक कहलाती है।
रचयिता
मीरा कन्नौजिया,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय हरखपुर,
विकास खण्ड-सिकरारा,
जनपद-जौनपुर।

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