100/2026, बाल कहानी- 26 मई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 100/2026
*26 मई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #तपता_सूरज
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"पकड़ो...पकड़ो" की तेज आवाजें बाल-बालिकाओं की आवाजें रोज की तरह आज भी सुनायी पड़ रही थी। बीच-बीच में हँसी और किलकारी की आवाजें भी गूँजती जाती थी। वहीं पास में नीम का एक पुराना घना छायादार वृक्ष था। उससे कुछ ही दूर बिशाल वट-वृक्ष अपनी घनी और शीतल छाया से आस-पास के सभी मकानों को ढ़ककर धूप की तीक्ष्ण और नुकीली किरणों से सबको बचाता था। घरों में पंखों की गर्म तेज हवाएँ लू से किसि तरह कम नहीं लगतीं। इसीलिए अक्सर इन दिनों में लोग समय पास करने के लिए बट और नीम के वृक्ष के नीचे या पास ताश खेलते और आपस में बतियाते हुए खेल रहे बच्चों पर भी नजर डालते और धूप में न जाने और छाया में खेलने की हिदायत देते रहते।
आज बच्चे नीम के वृक्ष के आस-पास खेल रहे थे। कभी-कभार ध्यान न रहने या खेल में मस्त हो जाने के कारण उन्हें ये ध्यान न रहता कि वह धूप में हैं। उन बच्चों के अभिभावक जब उन्हें डाँटते, तभी वह छाया में आकर खेलते। बड़े लोग उनका पानी पीने का सतत् ध्यान रखते।
तभी अचानक एक लड़की नीचे गिरी और कुछ देर न उठी तो उनके साथी चिल्लाये-, अंकिल जी! देखो, अंकिता को क्या हो गया है?"
सबने समझा था कि उठ बैठेगी। रोज की तरह गिर पड़ी होगी। बच्चे तो रोज गिरते हैं। जब बच्चे चिल्लाये तो अंकिता के दादा ताश का खेल छोड़कर भागे। साथ में वहाँ उपस्थित सभी लोग दौड़े। पास जाकर देखा और सिर पर हाथ फेरकर पुकारा तो पता चला कि सिर बहुत गर्म है। सारा शरीर तप रहा है।
अंकिता लेकर उनके दादा तुरन्त लेकर घर पहुँचे। उसे कूलर की हवा में लिटाया गया। डाॅक्टर भी फोन पर सूचना पाकर तुरन्त आ गया। डाॅक्टर ने तुरन्त एक इंजेक्शन लगाया। थोड़ी देर में अंकिता को होश आया। डाॅक्टर ने उसे ग्लूकोज देने को कहा। अंकिता को ग्लूकोज दिया गया। उसे आराम करने दिया गया। डाॅक्टर ने कहा-, "इसे कल से दस बजे के बाद नई निकलने दिया जाए और शाम को छह बजे के बाद ही निकले। अभी खेलें कम। सुबह खेल सकती हैं शाम को नहीं। बारह बजे से साढ़े छह बजे तक का समय जानलेवा है। इस समय कोई भी न निकले। न बड़े, न छोटे।"
"सही कहा आपने डाॅक्टर साहब! आगे से मैं ध्यान रखूँगा। कल से मैं भी नहीं निकलूँगा शाम तक और बच्चों का ध्यान रखूँगा। सभी बच्चे कल से बाहर न निकलें। देखो! अंकिता की कितनी तबीयत खराब हो गई। केवल सुबह आठ बजे तक ही खेलें। शेष समय घर पर रहकर पढ़ाई, ड्राईंग, होमवर्क, आनलाइन पढ़ाई करें और आराम करें।" वहाँ खड़े हुए सभी बच्चे और उनके अभिभावकों ने डाॅक्टर और अंकिता के दादा की बात सुनी और निश्चय किया कि कल से वह भी शाम तक घर से बाहर नहीं निकलेंगे और न ही बच्चों को निकालेंगे। उन्हें घर पर ही खेल-खेल में पढ़ाई, गतिविधि और होमवर्क करवायें। "
#संस्कार_सन्देश -
तपते सूरज की मार से बचने का केवल एक ही मार्ग है- बच्चों को घर पर ही खेल व पढ़ाई तथा किस्से-कहानियों में व्यस्त रखें और आराम करने को कहें।
कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी (शि०मि०)
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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