82/2026, बाल कहानी- 05 मई
#दैनिक_नैतिक_प्रभात -
82/2026
*05 मई 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #जिम्मेदारी
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सीमा एक छोटे से गाँव में रहती थी। उसके परिवार में उसके माता-पिता, दादा-दादी और एक छोटी बहन थी। उसके पिताजी गाँव में ही एक छोटी-सी सिलाई की दुकान खोले हुए थे।
सीमा घर के कामकाज करने में अपनी माता की मदद करती थी और पढ़ाई भी करती थी।
आज दसवीं का रिजल्ट आने वाला था। सीमा सुबह से बड़ी बेचैन थी, पर माँ ने उसे समझाया कि, "बेटा! धीरज रखो। तुमने साल भर मेहनत की है और अच्छे अंक भी प्राप्त करोगी।" पर सीमा की बेचैनी और बढ़ रही थी। शाम होते-होते जब दसवीं का रिजल्ट निकला तो नतीजे देखकर वह बहुत खुश हुई और हो भी क्यों न, उसने दसवीं की कक्षा में बहुत अच्छे अंक प्राप्त कर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया था।
उसे विद्यालय में वार्षिक सम्मान समारोह में सम्मानित करने के लिए बुलाया गया। वह सबसे पहले जाकर अपनी अध्यापिका के गले लग गई और उन्हें 'धन्यवाद' दिया।
उसकी आँखों से खुशी के आँसू बह रहे थे। स्टेज पर पहुँचकर उसने कहा कि, "आज मैंने जो भी उपलब्धि हासिल करी है, वह मेरी शिक्षिका और माँ के सहयोग से प्राप्त की है। मेरे घर वाले नहीं चाहते थे कि मैं आगे की पढ़ाई करूँ और कुछ परिस्थितियाँ भी ऐसी बन गई थी, जिनके बारे में आज मैं आपसे चर्चा जरूर करना चाहूँगी। वह बताती है कि साल भर पहले मेरी माँ के पैर में फैक्चर आ गया था, जिस कारण वह घर का काम-काज नहीं कर पा रही थी। पिताजी मेरी पढ़ाई के खिलाफ थे। उन्होंने कहा, "बस! हो गई पढ़ाई! अब घर के काम संभालो।" घर के काम-काज की सारी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी।
मैंने भी उसे अपना नसीब मानकर पढ़ाई बन्द कर दी और धीरे-धीरे दो महीने का समय बीता। गाँव की मेरी सहेलियाँ जब विद्यालय जाती तो मैं उन्हें देखती रहती। मेरी माँ मुझे देखकर दु:खी रहती। वे मुझे विद्यालय जाने के लिए कहती, पर मै उनकी बातों को अनसुना कर देती। एक दिन जब अध्यापिका मेरे घर में सम्पर्क करने आयी, तब उन्होंने मुझे समझाया और कहा कि, "तुम जैसी होनाहार छात्रा को इस तरह चुपचाप नहीं बैठना चाहिए और अपनी आगे पढ़ाई जारी रखना चाहिए।" उन्होंने मेरे घर वालों को खूब समझाया। तब पिताजी मेरी पढ़ाई के लिए राजी हो गए और मैं पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम भी करने लगी। आज नतीजा आपके सामने है। मैंने अपने सपनों को पूरा किया। मेरा यही कहना है कि हमें बच्चों को शिक्षा से वंचित नहीं रखना चाहिए। उन्हें शिक्षा का पूरा अधिकार देना चाहिए।
घर की परेशानियाँ बच्चों की शिक्षा में बाधा नहीं बनना चाहिए। उसकी बातें सुनकर वहाँ उपस्थित सभी ने तालियाँ बजाकर उसका स्वागत किया।
#संस्कार_सन्देश -
हमें घर की परिस्थितियों के विपरीत होने पर बच्चों के पढ़ाई नहीं छुड़वाना चाहिए। उन्हें उनकी प्रतिभा के अनुसार शिक्षा के पूरे अवसर देने चाहिए।
कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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