शिक्षक धर्म
ज्ञान पुँज की दीप्त किरण से
अज्ञान तिमिर घनघोर हटाएँ
जीवन मार्ग प्रशस्त करें वह
अशिक्षा के श्राप से मुक्त कराएँ।
विकसित करें भावी पीढ़ी को
मानव मूल्यों को समझाएँ
शील धर्म उपकार सत्यता
कर्मठता का पाठ पढ़ाएँ।
स्वावलंबी और लगन शील हर
बालक और बालिका बन जाए
झंझावातों से हमें है जूझना
सुफल सुपथ अभियान बनाएँ।
शिक्षार्थी हों पढ़ने को तत्पर
प्रतिदिन नव युक्ति अपनाएँ
रहे ना कोई ज्ञान से वंचित
ऐसा एक संकल्प उठाएँ।
ज्ञान की बगिया हरी भरी हो
झूमे पुष्प और बढ़ें लताएँ
कलम को ही हथियार बना लें
जब भी विपत्ति से घिर जाएँ।
राष्ट्र सृजन विद्यालय गोद में
भारत का भविष्य गढ़ जाएँ
ऐसे कर्मठ ज्ञान के दाता
जग में आदर्श शिक्षक कहलाए।
रचयिता
भारती खत्री,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय फतेहपुर मकरंदपुर,
विकास खण्ड-सिकंदराबाद,
जनपद-बुलंदशहर।

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