वतन की शान हिन्दी है
वतन की जान हिन्दी है,
वतन की शान हिन्दी है।
ये भारत माँ के माथे की,
चमकती स्वर्ण बिन्दी है॥
है हिन्दुस्तान की पहचान,
प्यारी राजकीय भाषा।
आपका मान हिन्दी है,
मेरा सम्मान हिन्दी है॥
मातृभाषा, राष्ट्रभाषा,
प्रेम व प्यार की भाषा।
जगाती है सभी के दिल में,
ये अपनत्व की आशा॥
हमारी वास्तविक पहचान भी,
हिन्दी कराती है।
धड़कती दिल मे भारत के,
हमारी राष्ट्र की भाषा॥
सभी भाषाओं में है श्रेष्ठ,
हिन्द की गरिमा है हिन्दी।
खेत खलिहान का वैभव,
सूर्य का ओज है हिन्दी॥
सभी के चेहरे की मुस्कान,
जीवन वाहिनी हिन्दी।
ये गंगा यमुना सी पावन,
हमारी शान है हिन्दी॥
चाहें मन्दिर हो या हो घर,
चाहें विद्यालय या दफ्तर।
मधुर अनमोल सी भाषा,
ये बोली जाती है घर-घर।
माँ की लोरी, गीत संगीत,
सुरमय 'माधुरी' हिन्दी।
मूल्य इसका समझ प्यारे,
करले सत्कार और आदर॥
रचयिता
मन्जू शर्मा,
सहायक अध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय नगला जगराम,
विकास खण्ड-सादाबाद,
जनपद-हाथरस।

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