अनूठी हिंदी
सबसे सुंदर भाषा हिंदी,
जनमानस की आशा हिंदी।
मीठी सरल मनोहर हिंदी,
मधुरिम और अनूठी हिंदी।।
भाषा ही नहीं पहचान भी है,
हिन्दुस्तान की जान भी है।
अपनापन है इसमें अद्भुत,
बेहद मधुरिम मुस्कान भी है।।
आधारशिला ये जीवन की,
ममता की लोरी जैसी है।
भावों को जोड़कर रखती है,
यह घर के मुखिया जैसी है।।
आभा इसकी दिन रात बढ़े,
हिंदीमय हिंदुस्तान हो।
एक राष्ट्र है एक भाषा हो,
बस इतनी पहचान हो।।
रचयिता
डॉ0 शालिनी गुप्ता,
सहायक अध्यापक,
कंपोजिट विद्यालय मुर्धवा,
विकास खण्ड-म्योरपुर,
जनपद-सोनभद्र।

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