हिंदी दिवस
भारत माता के मस्तक पर
निज गौरव बन कर सजी हूँ मैं
अलंकारों से भरी हूँ मैं
संधि समास से सजी हूँ मैं।
छंदों की मधुर कहानी हूँ
गीतों की धुन पुरानी हूँ।
वीरों की अमिट कहानी हूँ
धरती की चुनर धानी मैं।
सीने पर तिरंगा सजा हुआ
हूँ देश प्रेम की दीवानी मैं
हूँ शब्दों की मर्यादा मैं
भाषाओं की हूँ रानी मैं।
गागर में सागर भरती हूँ
बस प्रेम स्नेह ही करती मैं
मेरे तन मन में श्रृंगार भरा
कवि की कविता की कृति हूँ मैं।
वाणी के परचम लहराती
रचना का अद्भुत हूँ महाकाव्य
मैं जननी हूँ मैं हिंदी हूँ
माँ के माथे की बिंदी मैं।
निर्मल निर्झर सी बहती मैं
सुर सरिता की प्रबल प्रवाह हूँ मैं।
सम्मान करो, अभिमान करो
अपनी भाषा का तुम मान करो।
अस्तित्व मेरा यूँ बना रहे
प्रतिपल इसका यूँ भान करो।।
रचयिता
मंजरी सिंह,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय उमरी गनेशपुर,
विकास खण्ड-रामपुर मथुरा,
जनपद-सीतापुर।

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