हिंद की हिंदी
हिंदुस्तान की रग- रग में हिंदी,
हर हिंदुस्तानी की शान है हिंदी,
हिंदी है हर जन की बिंदी,
ऐसी है हिंद की हिंदी।
चंद शब्दों से मन को समझाती
रूठे को हँसना सिखाती
जीवन को परिभाषित करती
ऐसी है हिंद की हिंदी।
जब मन चाहे टाँग अड़ा दे,
इतरानों की खिल्ली उड़ा दे,
बिगड़े का काम बना दे,
ऐसी है हिंद की हिंदी।
एक शब्द के कई पर्याय,
भाषा को समृद्ध बनाएँ,
चंद शब्दों में सब कुछ कह जाए,
बिन इस के संवाद भी थम जाए,
ऐसी है हिंद की हिंदी।
संस्कृत की उत्तराधिकारी बनकर,
राष्ट्र भाषा का प्रतिनिधित्व करती,
जन- मानस को विस्तारित करती,
ऐसी है हिंद की हिंदी।
हिंदी दिलाती है विश्व में सम्मान,
इससे ही है राष्ट्र की शान,
उन्नति का मार्ग दिखाती,
ऐसी है हिंद की हिंदी।
रचयिता
भारती मांगलिक,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट विद्यालय औरंगाबाद,
विकास खण्ड-लखावटी,
जनपद-बुलंदशहर।

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