आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी

धन्य हुई बलिया की माटी, 

साहित्य रतन ने जन्म लिया।

अनमोल पिता माता ज्योतिष्मती,

 शुभ वैद्यनाथ था नाम दिया।।


काशी में विद्यार्जन करके,

शास्त्री और आचार्य बने।

संग जुड़ा भगवती संगिनी,

गुरु रविन्द्र नाथ बने।।


सरस्वती माँ के आराधक,

नव साहित्यक सृजन किया।

मानवता के थे प्रतिपादक, 

विविध विधा को वरण किया।।


फक्कड़ बाबा के वे चेले थे,

दृढ़प्रतिज्ञ विद्वान नवेले थे।

इनके जैसा ना हुआ कोई,

लाल हजारी तो अलबेले थे।।

 

रचयिता

डॉ0 शालिनी गुप्ता,

सहायक अध्यापक,

कंपोजिट विद्यालय मुर्धवा,

विकास खण्ड-म्योरपुर, 

जनपद-सोनभद्र।



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