167/2026, बाल कहानी- 22 सितम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 167/2026
*22 सितम्बर 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #झगडू_प्रसाद_और_चुगलखोर_मैना
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एक गाँव में झगड़ू प्रसाद नाम का एक व्यक्ति रहता था। नाम की तरह ही उसका स्वभाव भी था। हर छोटी-बड़ी बात पर झगड़ना उसकी आदत थी।
कभी दूधवाले से कहता, "दूध में पानी ज्यादा है!"
कभी सब्जीवाले से उलझ जाता, "आलू इतने महँगे क्यों?"
और कभी पड़ोसी से बिना बात ही बहस शुरू कर देता।
उसी गाँव के पुराने पीपल के पेड़ पर एक मैना रहती थी। वह बहुत बोलती थी और उसे दूसरों की बातें इधर-उधर बताने की बड़ी आदत थी। गाँव वालों ने उसका नाम रख दिया था - "चुगलखोर मैना"।
एक दिन मैना ने झगड़ू प्रसाद को अपने पड़ोसी से कहते सुन लिया, "रामू बहुत कंजूस है। किसी के काम नहीं आता।"
मैना उड़कर रामू के घर पहुँची और बोली, "रामू! झगडू प्रसाद कह रहे थे कि तुम बहुत कंजूस हो!"
रामू को गुस्सा आ गया।
अगले दिन रामू ने झगड़ू प्रसाद से कहा, "तुमने मुझे कंजूस कहा?"
झगड़ू प्रसाद भड़क गए, "मैंने कब कहा?"
तभी मैना पेड़ पर बैठकर जोर-जोर से बोली, "कहा था! कहा था! मैने अपने कानों से सुना था!"
अब दोनों में खूब झगड़ा होने लगा।
अगले दिन मैना ने झगड़ू प्रसाद की एक और बात दूसरे पड़ोसी तक पहुँचा दी। फिर तीसरे दिन किसी की बात चौथे के घर पहुँचा दी।
धीरे-धीरे गाँव में छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगे।
एक दिन गाँव के बुजुर्ग मुखिया ने सबको चौपाल पर बुलाया। उन्होंने कहा, "बात फैलाने से पहले यह देखना चाहिए कि वह सच है या नहीं और किसी की कही बात को बिना समझे आगे बढ़ाना आग में घी डालने जैसा है।"
फिर मुखिया ने मैना से पूछा, "तुम दूसरों की बातें इधर-उधर क्यों बताती हो?" मैना चुप हो गई।
फिर मुखिया ने झगड़ू प्रसाद से कहा, "और आप हर बात पर झगड़ते क्यों हैं?"
झगड़ू प्रसाद ने फिर सिर झुका लिया।
दोनों को अपनी गलती समझ आ गई।
झगडू प्रसाद ने कहा, "आज से मैं बिना बात किसी से नहीं झगड़ूँगा।"
मैना बोली, "और मैं किसी की निजी बात इधर-उधर नहीं बताऊँगी।
उस दिन के बाद गाँव में फिर शान्ति लौट आई।
अब जब भी मैना को किसी की बात बताने की इच्छा होती, वह खुद से कहती, "जो बात किसी के सामने कहने लायक नहीं, उसे किसी और के कान तक पहुँचाना भी ठीक नहीं।"
और झगडू प्रसाद? उन्होंने भी एक नया नाम कमा लिया- "समझदार प्रसाद"।
#संस्कार_सन्देश -
बिना सोचे-समझे बात फैलाना रिश्तों में दरार डालना है और हर बात पर झगड़ना समस्या को और बढ़ा देता है। समझदारी इसी में है कि बात को सुनें, समझें और फिर प्रतिक्रिया दें।
कहानीकार-
#रुखसार_परवीन (स०अ०)
उच्च प्रा० वि० गजपतिपुर
बहराइच (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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