155/2026, बाल कहानी- 07 सितम्बर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 155/2026
*07 सितम्बर 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी - #सबसे_बड़ा_उपहार
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सुमेरपुर नामक एक छोटे-से विद्यालय में राघव नाम का एक बच्चा पढ़ता था। वह बहुत होशियार था, लेकिन उसकी एक आदत अच्छी नहीं थी। वह अपनी गलतियाँ मानना पसन्द नहीं करता था।
एक दिन हिन्दी की कक्षा में अध्यापिका रनों मैडम ने बच्चों को एक सवाल दिया। सभी बच्चे सवाल हल करने में जुट गए। राघव ने भी जल्दी-जल्दी उत्तर लिख दिया।
मैडम ने उसकी कॉपी देखी और बोलीं, “राघव! तुम्हारा उत्तर गलत है। एक बार फिर ध्यान से सोचो।”
उसे बुरा लगा। उसने कहा,
“मैडम! मेरा उत्तर गलत नहीं हो सकता। मैंने बहुत सोचकर लिखा है।”
मैडम मुस्कुराईं और बोलीं,
“गलती होना बुरी बात नहीं है, बेटा। गलती से सीखने से इनकार करना बुरी बात है।”
अगले दिन विद्यालय में शिक्षक दिवस मनाया जाना था। सभी बच्चे अपने शिक्षकों के लिए कुछ न कुछ उपहार लाने वाले थे। कोई फूल लाया, कोई सुन्दर कार्ड और कोई चॉकलेट।
राघव ने सोचा, “मैं मैडम को सबसे अच्छा उपहार दूँगा।”
लेकिन उसे समझ नहीं आया कि क्या द
शाम को वह घर पहुँचा तो उसने अपनी कॉपियाँ खोलीं। उसे मैडम की कही बात याद आयी , “गलती से सीखने से इनकार करना बुरी बात है।”
उसने अपनी पुरानी कॉपी निकाली। उसमें कई गलतियाँ थीं। राघव ने पहली बार अपनी गलतियों को ध्यान से देखा और एक-एक करके उन्हें ठीक करना शुरू किया।
अगले दिन शिक्षक दिवस था
बच्चों ने अपने-अपने उपहार शिक्षकों को दिए। जब तघव की बारी आई।
उसने मैडम को एक छोटी-सी कॉपी दी। मैडम ने कॉपी खोली। पहले पन्ने पर लिखा था- “मेरी गलतियाँ और उनसे मिली मेरी सीख।”
हर पन्ने पर राघव ने अपनी एक गलती लिखी थी और उसके नीचे लिखा था कि उसने उससे क्या सीखा!
मैडम की आँखें खुशी से चमक उठीं। उन्होंने राघव के सिर पर हाथ रखते हुए कहा, “बेटा! आज तुमने मुझे सबसे अनमोल उपहार दिया है।”
राघव ने पूछा, “मैडम! इसमें ऐसा क्या खास है?”
मैडम बोलीं, “फूल कुछ दिनों में मुरझा जाते हैं, चॉकलेट खत्म हो जाती है, लेकिन सीखने की आदत जीवन भर साथ रहती है।” राघव बहुत खुश हुआ।
उस दिन उसे समझ आया कि शिक्षक केवल किताबों के प्रश्नों के उत्तर नहीं बताते, बल्कि वे हमें अपने जीवन के उत्तर खोजने की राह भी दिखी।

#संस्कार_सन्देश -
शिक्षक हमारे जीवन में ज्ञान के साथ-साथ आत्मविश्वास, अनुशासन और सही सोच का प्रकाश भरते हैं। हमें अपने शिक्षकों का और उनकी शिक्षकों का सम्मान करना चाहिए।

कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल (स०अ०)
उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरुआ, सरसौल, कानपुर नगर

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