161/2026, बाल कहानी- 14 सितम्बर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 161/2026
*16 सितम्बर 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी- #चालाक_लोमड़ी_और_समझदार_कौवा
-----------------------
एक कौवा भूखा था। वह खाने की खोज में गाँव की तरफ उड़ते हुए गया,जहाँ उसे रोटी का एक टुकड़ा मिला। जिसे वह अपनी चोंच में दबाकर आ गया और जंगल में पेड़ पर बैठकर वह अपनी रोटी खाने की तैयारी ही कर रहा था, तभी अचानक एक लोमड़ी की नजर उस पर पड़ गई। लोमड़ी को भी भूख लगी थी, तो उसने सोचा क्या किया जाए, जिससे इस कौवे की रोटी मुझे मिल जाए?
उसने तुरन्त अपना दिमाग लगाते हुए कौवे से कहा कि, "अरे भैया! कितने दिन हो गए, तुम्हारी मीठी आवाज में गाना नहीं सुना।" जरा एक मीठा-सा गाना गाकर सुनाओ तो मुझे आनन्द आ जायेगा। अभी तक किसी ने इस प्रकार से कौवे के गाने की प्रशंसा नहीं की थी, लोमड़ी द्वारा प्रशंसा किये जाने पर कौवा अपना होश खो बैठा और तुरन्त गाना गाने के लिए अपना मुँह जैसे ही खोला, उसके मुँह में दबे रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया और लोमड़ी उस रोटी के टुकड़े को उठाकर आराम से खाने लगी।
कौवा बहुत निराश हुआ। उसे अपनी गलती पर पश्चाताप हो रहा था। उसने फैसला किया कि वह अपनी भूख मिटाने के लिए दुबारा प्रयास करेगा। कौवा गाँव की तरफ उड़ा। इस बार उसे फिर से एक रोटी का टुकड़ा मिला, वह बहुत खुश हुआ। इस टुकड़े को अपनी चोंच में दबाकर वापस उसी पेड़ पर लौट आया, जिस पेड़ के नीचे लोमड़ी पहले से बैठी आराम कर रही थी। उसने देखा कि कौवा इस बार फिर एक रोटी का टुकड़ा ले आया है। कौवे को रोटी का टुकड़ा खाते देख लोमड़ी ने फिर चालाकी दिखाते हुये कहा कि, "कौवा भैया...कौवा भैया इस बार जरा एक गाना और सुना दो, तुम्हारी बड़ी महानता होगी।" इस बार कौवे ने दिमाग लगाया और उसने रोटी के टुकड़े को पंजे से दबाते हुए फिर काँव-काँव करके लोमड़ी को खूब गाना सुनाता रहा और मजे से रोटी का टुकड़ा भी खाता गया। कौवे की समझदारी से अब लोमड़ी अपना चालाकीपन भूल गई। और निराश होकर वहाँ से चली गयी।
#संस्कार_सन्देश -
गलती करना बुरा नहीं है, पर एक ही गलती बार-बार दोहराना बुद्धिमानी नहीं है। हमें अपनी गलती से सीखना चाहिए।
कहानीकार-
#शैलेश_कुमार_त्रिपाठी
(खण्ड शिक्षा अधिकारी)
वि० क्षे० गोहाण्ड
जनपद- हमीरपुर (उ०प्र०)
✏️संकलन
टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
Comments
Post a Comment